तृणमूल में दो फाड़ की हद तक तनाव

राजनीति

अजय भट्टाचार्य
बंगाल
की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उन्हीं के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बीच जारी तनाव महत्वपूर्ण मोड़ पर है। अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के समर्थकों के बीच एक दूसरे के समर्थन में किए जा रहे पोस्ट के बीच पिछले शनिवार ममता बनर्जी के आवास पर बुलाई आपातकालीन बैठक में 20 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन में अभिषेक बनर्जी सहित पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं को जगह नहीं दी गयी है। इस सब के बीच कैसा कयास लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों तृणमूल पार्टी दो हिस्सों में बट जाये।
एक व्यक्ति एक पद का विवाद हो या आईपैक के साथ मनमुटाव की चर्चाओं के बीच तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन ने राष्ट्रीय स्तर पर सभी पदों को फिलहाल के लिए समाप्त कर दिया। दूसरे नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन कर कमान खुद के हाथों में रखी। आपातकाल में बुलाई गयी ममता की इस बैठक में पार्टी नेताओं को साफ संदेश दिया गया कि तृणमूल का मतलब ममता बनर्जी है। न कोई ममता बनर्जी के आगे है न कोई उनके पीछे। पार्टी का नेतृत्व एकमात्र ममता बनर्जी ही करेंगी। 27 फरवरी को राज्यभर में नगरपालिका चुनाव होने जा रहे हैं। इस चुनाव में तृणमूल के उम्मीदवारों को जिताने के लिए ममता बनर्जी ने अपने नेताओं को निर्देश दिया है कि वे पार्टी को प्राथमिकता दें। किसी तरह की आपसी प्रतिद्वंद्विता को तवज्जो नहीं देना है।
सूत्रों की माने तो बैठक में ममता बनर्जी ने अभिषेक समेत बाकी नेताओं को यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी में दो राय नहीं चलेगी। सभी को एक साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा। बैठक में मौजूद 7 नेताओं ने ममता के प्रति आस्था जताते हुए हामी भरी तथा हस्ताक्षर करके उनकी बातों का समर्थन किया। “एक व्यक्ति एक पद” को लेकर अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के समर्थकों के बीच बढ़े तकरार को लेकर यह बैठक महत्वपूर्ण थी। दो फरवरी को ममता बनर्जी को राष्ट्रीय चेयरमैन चुना गया था। नई समिति में ममता बनर्जी, अमित मित्रा, पार्थ चटर्जी, सुब्रत बक्शी, सुदीप बंद्योपाध्याय, अभिषेक बंद्योपाध्याय, बालुचिकी बराइक, चंद्रिमा भट्टाचार्य, काकुली घोष दस्तीदार, सुखेंदु शेखर रॉय, ज्योतिप्रिय मल्लिक, असीमा पात्र, मलय घटक, राजेश त्रिपाठी, अनुव्रत मंडल, गौतम देव का नाम शामिल है। जाहिर है कि अभिषेक बनर्जी के पार्टी में एक व्यक्ति -एक पद के नियम को आगे बढ़ाने की कवायद को झटका लगा है। कई वरिष्ठ नेताओं के पास कई पद हैं। कई लोगों द्वारा इसे ममता बनर्जी और उनके महत्वाकांक्षी भतीजे के बीच मतभेद उभरने के तौर पर देखा जा रहा है, जो पार्टी में नंबर दो के नेता माने जाते हैं। लेकिन इस लड़ाई के बीच प्रशांत किशोर की आई-पीएसी आ गई है। जो पश्चिम बंगाल चुनाव से ही तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर रही है। प्रशांत किशोर के साथ अभिषेक के ‘रिश्‍तों’ में कड़वाहट का मुद्दा पहले ही खबरों में बना हुआ है।
इसके अलावा, तृणमूल नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और आईपेक के बीच भी विवाद सामने आया जब चंद्रिमा ने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर की टीम की ओर से उनके सोशल मीडिया अकाउंट का दुरुपयोग किया जा रहा है. इस दावे पर आईपेक ग्रुप की ओर से ट्वीट किया, आईपेक तृणमूल कांग्रेस या इसके किसी नेता की ‘डिजिटल प्रापर्टी’ को हैंडल नहीं करता और ऐसा दावा करने वाला व्‍यक्ति या तो जानकारी नहीं है या फिर वह झूठ बोल रहा है।

पिछले कुछ सप्‍ताह से ममता बनर्जी और प्रशांत किशोर के बीच मतभेद बढ़ने को लेकर अटकलों का दौर जारी है। बंगाली दैनिक आनंदबाजार पत्रिका ने दोनों के बीच एसएमएस का आदान-प्रदान होने की भी जानकारी दी है। प्रशांत किशोर ने ममता को टेक्‍स्‍ट मैसेज में लिखा कि वे बंगाल, मेघालय और ओडिशा में टीएमसी के लिए काम नहीं करना चाहते जिसका जवाब सीएम ममता ने ‘धन्‍यवाद’ कहते हुए दिया।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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