मोदी पर दीदी की ममता के निहितार्थ

लेख

अजय भट्टाचार्य
पश्चिम
बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी (mamata banerjee) का अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के प्रति उमड़ा प्रेम विपक्ष की राजनीति को भ्रमित कर रहा है। बीते सोमवार को विधानसभा में केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के खिलाफ प्रस्ताव पर अपना वक्तव्य रखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे यकीन है, राज्य में केंद्रीय एजेंसियों की कथित ज्यादतियों के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ नहीं है। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata party) के नेताओं का एक तबका अपना हित साधने के लिए एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहा है। केंद्रीय जांच एजेंसियों की ‘ज्यादतियों’ के खिलाफ बोलते हुए ममता ने प्रधानमंत्री से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि केंद्र सरकार का एजेंडा और उनकी पार्टी के हित आपस में न मिले। वर्तमान केंद्र सरकार तानाशाहीपूर्ण तरीके से व्यवहार कर रही है। यह प्रस्ताव किसी खास के खिलाफ नहीं है, बल्कि केंद्रीय एजेंसियों के पक्षपातपूर्ण कामकाज के खिलाफ है। दरअसल मोदी के प्रति दीदी की ममता जागने के पीछे अडानी की बिजली कंपनी को मिला ठेका है जिसकी आपूर्ति लाइन बंगाल से होकर ही जाएगी। पिछले दिनों ममता बनर्जी से गौतम अडानी (Gautam Adani) की भेंट के बाद ममता के तेवर मोदी के प्रति नरम पड़े हैं। इसके साथ ही दांवपेंच में फंसा बंगाल ताजपुर पोर्ट (Tajpur Port) का संकट आखिरकार दूर हो गया। अडानी समूह यह पोर्ट तैयार करेगा। बीते सोमवार को ममता कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया। ने बताया कि कागजी प्रक्रिया कुछ बाकी है, वह पूरी होने के बाद ही पोर्ट चालू किया जाएगा। जानकारी के अनुसार 2025 तक इस डीप पोर्ट सी का काम पूरा होगा जिसे तैयार करने में करीब 25 हजार करोड़ रुपये की लागत आ सकती है। मालूम हो कि ताजपुर पोर्ट में निवेश के लिए गौतम अडानी ने इच्छा जतायी थी, इस बाबत उन्होंने नवान्न में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बैठक भी की थी। एक तरफ ममता विपक्ष की धुरी भी बनना चाहती हैं दूसरी तरफ उनका अचानक जागा मोदी प्रेम क्या मोदी को उन आरोपों से उन्हें मुक्त कर रहा है, जिन पर आज देश की जनता मोदी से सवाल कर रही है। क्या वह मोदी जी को छोड़कर अमित शाह (Amit Shah) को घेरना चाहती हैं और उन्होंने फैसला कर लिया है कि मोदी जी अच्छे हैं। सरकार में मोदी की स्वीकृति के बिना परिंदा भी पर नहीं मारता है और ऐसे में अगर प्रधानमंत्री को जब आप क्लीनचिट देते हैं, तो क्या आप उन आरोपों से बरी करते हैं, जिन पर आज देश सवाल पूछ रहा है। ममता अगर विपक्ष में हैं तो यह लुका-छिपी का खेल नहीं खेला जाना चाहिये।

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