रथोत्सव में कुरान की आयतें बनीं मंत्र

लेख समाचार

अजय भट्टाचार्य
उत्तर प्रदेश
विधानसभा चुनाव से पहले ही सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की चिंगारी कर्नाटक से फूटी थी। इसकी शुरुआत हिजाब विवाद से हुई थी। इसके बाद हिंदू धार्मिक मेलों में गैर-हिंदू व्यापारियों पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया गया और फिर हलाल मांस का बहिष्कार करने और मस्जिदों में लाउडस्पीकर बंद करने का अभियान चलाया गया। अब हिंदू नववर्ष, रामनवमी और हनुमान जयंती के बहाने देश भर में धार्मिक चोले में उन्मादी भीड़ सड़कों पर है और केन्द्रीय सत्ता प्रतिष्ठान अंधा-गूंगा-बहरा बना हुआ है। मगर इस पूरे कुचक्र को नेस्तनाबूद करती एक खबर कर्नाटक से ही आई है जहां एक प्रतिष्ठित हिंदू उत्सव का आरंभ ही कुरान की आयतों के वाचन से हुआ।

कर्नाटक में हसन जिले के बेलूर स्थित चेन्नाकेशव मंदिर ने वर्षों से चली आ रही उस परंपरा को बनाये रखा जिसके तहत ‘रथोत्सव’ की शुरुआत कुरान की आयतें पढ़कर की जाती है। परंपराओं का पालन करते हुए डोड्डा मेदुरु के काजी सैयद सज्जाद बाशा ने गत बुधवार दो दिवसीय रथोत्सव के पहले दिन कुरान की आयतों को पढ़ा, जिसके बाद रथ को खींचा गया। वहां के अधिकारियों के अनुसार, यह स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं है कि मंदिर के मेले में कुरान की आयतों को पढ़ने की परंपरा कब शुरू हुई। वैसे 1932 की मंदिर नियमावली में इस परंपरा के बारे में उल्लेख है जिसका आज तक पालन किया जा रहा है। रथोत्सव में हजारों लोग इकट्ठा हुए थे जिसमें भगवान विष्णु के अवतारों में से एक, भगवान चेन्नाकेशव को रथ में ले जाते हुए देखा गया था। बाशा ने मंदिर के अधिकारियों, स्थानीय नेताओं और लोगों की मौजूदगी में कुरान की आयतों को पढ़ा था।
बाशा ने कहा, ‘मैं पिछले 50 वर्षों से इस त्योहार पर कुरान की आयतों को पढ़ रहा हूं। यह प्रार्थना करने के लिए किया जाता है कि चेन्नाकेशव स्वामी सभी के लिए अच्छा करें। हम सभी चाहे हिंदू हों या ईसाई या मुसलमान, एक साथ मिलकर शांति से रहने चाहिए और हमारे बीच कोई मतभेद नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम में शामिल हुए पूर्व मंत्री एवं जनता दल (सेक्युलर) के विधायक एच डी रेवन्ना ने कहा कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे जारी रखा जाना चाहिए। सभी समुदायों – हिंदू, मुस्लिम, ईसाई- के लोगों को एक साथ शांति से रहना चाहिए। शायद यही वह उद्देश्य हो सकता है जिसके साथ परंपरा शुरू की गई थी। आइए किसी भी ताकत को हमें विभाजित करने की अनुमति न दें।

एक स्थानीय निवासी के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के कारण पिछले दो वर्षों से रथोत्सव का आयोजन नहीं हुआ था, लेकिन इस बार सभी परंपराओं का पालन करते हुए इस त्योहार को भव्य तरीके से मनाया गया। हालांकि, हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती (मुजराई) विभाग ने संबंधित हितधारकों और पुजारियों से सुझाव लिया था और इसके बाद परंपरा के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया गया। गैर-हिंदू व्यापारियों को भी स्टॉल लगाने और उत्सव में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। विवाद के बीच इस साल लगभग 15 मुस्लिम व्यापारियों ने अपनी दुकानें लगाई।

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