ये मुर्दों का गाँव..!

लेख

अजय भट्टाचार्य
देश
इन दिनों भीड़ में बदलते धर्म की गिरफ्त में है। इस हफ्ते दो घटनाओं ने भीड़ के धर्म का विकृत चेहरा दिखाया है। पहले हम दक्षिण पश्चिम दिल्ली के छावला इलाके में स्थित एक फार्महाउस की बात करें। फार्महाउस के केयरटेकर की गौकशी के शक में पीट पीटकर हत्या कर दी गई। उसके 2 साथी भी घायल हैं। चौंकिए मत क्योंकि जिसकी हत्या की गई वह कथित गोहंता कोई मुस्लिम नहीं बल्कि हिंदू ही था और जिन पर उसकी हत्या का इल्जाम है वह भी मुस्लिम नहीं है, धर्म रक्षक-गोरक्षक हिंदू ही है। कबीर ने धर्म के इसी वितंडवाद पर लिखा था- साधो यह मुर्दों का गाँव! आप चाहें तो इसे मुर्दों का देश भी कह/पढ़ सकते हैं।
दिल्ली के फार्महाउस कीपर की हत्या के सिलसिले में पुलिस का कहना है कि मौके से मांस के कुछ अवशेष मिले हैं जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। 40 साल के राजाराम की पत्नी जाशो और उनके 4 छोटे बच्चे,सब बेसहारा हो गए हैं। इसी सोमवार की सुबह तड़के जब पूरा परिवार सो रहा था, उसी समय कुछ कथित गौरक्षकों ने राजाराम पर हमला कर दिया। हमले में दो और लोग घायल हुए हैं। राजाराम को इतना पीटा गया कि उसकी मौत ही गई। यह लेख लिखे जाने तक राजाराम का शव अस्पताल में पड़ा था। पुलिस ने उसकी पत्नी को यह तक नहीं बताया था कि राजाराम की मौत हो चुकी है। राजाराम की पत्‍नी जाशो का कहना है कि गौहत्या की बात बिल्कुल झूठी है। हमें नहीं पता क्या कैसे हुआ,हम अंदर सो रहे थे। हम गाय काटने के बारे में सोच भी नहीं सकते। राजाराम फार्महाउस में केयरटेकर थे। इस मामले में दिल्ली पुलिस का बयान भी संदेह के घेरे में है। पुलिस का दावा है कि उसे सोमवार सुबह फार्महाउस में गौकशी की सूचना मिली। जब पुलिस मौके पर पहुँची तो गौकशी के आरोप में राजाराम समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सभी की मेडिकल की जांच के बाद उन्हें थाने लाया गया। थाने में एक आरोपी शानू ने बताया कि गौकशी के दौरान उनकी कुछ लोगों ने पिटाई की है। इस बीच,आरोपी राजाराम की तबीयत खराब हुई, उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया ,लेकिन राजाराम के कातिल अब तक फरार हैं। खास बात ये है कि राजाराम के फार्महाउस में कई गायें हैं। उसकी पत्नी का कहना है कि इन गायों की सेवा वो ही करती हैं और इनका दूध बेचकर खर्चा चलाती है। राजाराम का 14 साल का बेटा भी गुरुग्राम की एक गौशाला में काम करता है। राजाराम के दोस्त उमेश का भी यही कहना है कि गाय काटने वाली बात मैंने न कभी सुनी और न देखी। ये झूठे आरोप है। राजाराम के शव के पोस्टमार्टम से उसकी चोटों का पता चलेगा, फिलहाल राजाराम की मौत की नींद सुलाने वाले कथित गौरक्षक फरार हैं। इसे मात्र संयोग कह सकते है कि जिन रामजी के जन्मदिन को एक दिन पहले रामनवमी के रूप में मनाया गया उन्हीं रामजी के राजस्वरूप को राजाराम कहा जाता है। वह राजा राम जिसके वंश में गाय पर वीरता दिखाना गलत माना जाता था।
राजाराम की हत्या से ठीक पहले वाली रात न्यूज-18 के सौरव शर्मा और उनका परिवार उसी आग में जल गया जो उसका चैनल 18-18 घंटे काम करने वाले के चहेतों की शह पर लगाता है। धर्म बनी भीड़ भक्तिरस में विभोर मां दुर्गा का जागरण कर रही थी और सौरव शर्मा की मां समान पत्नी की साड़ी उतारने पर आमादा थी। याद रखें सनातन धर्म मे दूसरी औरत मां समान है लेकिन इन दिनों जिसे धर्म कहकर परोसा जा रहा है उस कथित हिंदुत्व में नहीं। गांधीजी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी महर्षि विनोबा भावे ने कहा था कि भारत में धर्म नहीं है बल्कि जो दीखता है वो रीतियाँ हैं और दिखावा है। ये रामलीला, देवी जागरण,गणेश यात्रा सब आयोजन हैं धर्म नहीं। आज धर्म की पालकी पर सवार सत्ता के अनुषांगिक संगठन देश की बड़ी आबादी के भीतर दोतरफा गुस्सा भर रहे हैं। उसी की नतीजा सौरव शर्मा ने महसूस किया है/होगा। कहा जाता है कि धर्म विवेक की शुद्धि करता है और उन्नति देता है। रामनवमी के दिन जहाँ-जहाँ धर्म के नाम पर उत्पात हुआ वह धर्म है क्या? उत्पात के बाद संबंधित प्रदेश की सरकार जिस बुलडोजरिया न्याय को महिमामंडित कर रही है और न्यूज18 समेत तमाम गोदी मीडिया जिसे सही साबित करने में लगा हैं उसका नतीजा भी उसे ही भुगतना होगा। सौरव शर्मा तो प्रारंभ है, अंत नहीं।

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