ये मुलाकात इक बहाना है..!

लेख समाचार

अजय भट्टाचार्य
ब्रिटेन
के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भारत की अपनी पहली अधिकारिक यात्रा पर राजधानी दिल्ली की बजाय गुजरात की राजधानी गांधीनगर से सटे अहमदाबाद पहुंचे। उनके स्वागत में देश की सत्तारूढ़ पार्टी के चहेते उद्योगपति गौतम अडानी ने पोस्टरों से अहमदाबाद की सड़कों को पाट दिया। यह नये भारत की वह तस्वीर है जिसमे किसी विदेशी प्रधानमंत्री की अगवानी कोई उद्योगपति ऐसे कर रहा है मानों वही देश का मुखिया हो। बुलडोजर माहात्म्य में डूबा भारतीय मीडिया को इतनी फुर्सत ही नही मिली कि वह यह सवाल पूछे कि आखिर अडानी समूह के मुख्यालय में किस डील पर चर्चा हुई!
वो तो भला हो इस मुलाकात के संदर्भ में अडानी समूह ने एक बयान जारी कर बताया कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री और समूह के अध्यक्ष गौतम के बीच की बैठक के एजेंडे में रक्षा क्षेत्र में सहयोग का मुद्दा सबसे ऊपर था। अडानी ग्रुप ब्रिटिश कंपनियों के साथ रक्षा और अंतरिक्ष तकनीकी क्षेत्र में काम करेगा। अडानी ने भारत में तीन सौ से अधिक विभिन्न श्रेणियों के रक्षा उपकरणों को लेकर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की मंशा जाहिर की है। अडानी ग्रुप ने कहा कि भारत 2030 तक भारतीय सशस्त्र बलों को उन्नत करने के लिए निर्धारित तीन सौ बिलियन के निवेश के साथ, अडानी ग्रुप रडार, जासूसी, मानव रहित और रोटरी प्लेटफॉर्म के साथ हाइपरसोनिक इंजन सहित कई क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। सच्चाई यह है कि अडानी की नजर भारत के रक्षा सौदों पर जमी हैं। अगले कुछ सालों में मोदी सरकार बड़े पैमाने पर हथियारो और सुरक्षा से जुड़े सौदे करने वाली है जहाँ अडानी का मुकाबला टाटा ग्रुप, महिंद्रा, रिलायंस डिफेंस और लार्सन एंड टूब्रो जैसी बड़ी कंपनियों से है। केंद्र सरकार ने 2016 में रक्षा सौदों मे मेक इन इण्डिया नीति लागू की थी। सभी कंपनियां भी बड़े मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट्स हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। अब इसमें अडानी ग्रुप का खेल समझिये। अडानी ने रक्षा सौदों के लिए जिस विवादित कंपनी का अधिग्रहण किया है उसके पुराने मालिक का ब्रिटेन से सीधा संबंध है। 2017 में ब्रिटेन की अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड में अडानी ने 400 करोड़ रुपये में एक बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी। इस कंपनी के पास भारत में रक्षा उपकरण बनाने का औद्योगिक लाइसेंस था। भारत के सबसे बड़े हथियार डीलर व ब्रिटिश नागरिक सुधीर चौधरी की यह अग्रणी कंपनी हुआ करती थी। ब्रिटेन में लिबरल डेमोक्रेट्स के समर्थक चौधरी ने 2004 से पार्टी को आर्थिक मदद भी की थी। हथियारों के सौदागरों की काली दुनिया में बन्नी के नाम से मशहूर सुधीर लॉबिंग की लॉबी में बहुत बड़ा और बहुत बदनाम नाम हैं।
सुधीर का नाम कुख्यात पनामा पेपर्स में सबसे बड़े खाताधारकों में आया था। भारत में रक्षा में ऑफसेट कार्यक्रम के लाभार्थियों में से सुधीर चौधरी एक रहे हैं। एक सीबीआई जांच मे पता चला था कि 2008 में 1125 करोड़ रुपये के बराक मिसाइल सौदे में हथियार दलाल एस एम नंदा और सुधीर चौधरी ने लाखों डॉलर कमाए थे। सुधीर चौधरी और उनके पुत्र को 2014 में लंदन में एक एसएफओ जांच के हिस्से के रूप में गिरफ्तार किया गया था, उन पर कथित तौर पर चीन और इंडोनेशिया में डील कराने के लिए रोल्स रॉयस को रिश्वत देने में मदद करने का आरोप था। भारत में भी रोल्स रॉयस सौदे की तरफ उंगली उठी और रक्षा मंत्रालय ने रोल्स-रॉयस से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा एयरो इंजन की खरीद की सीबीआई जांच का भी आदेश दिया। ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ और बीबीसी ने खुलासा किया है कि ब्रिटिश रक्षा कंपनी रॉल्स रॉयस ने भारत में हॉक एयरक्राफ्ट के इंजन का सौदा पाने के लिए एक बिचौलिये सुधीर चौधरी को पैसे दिए गए। साफ़ था कि 2014 तक सुधीर चौधरी रक्षा सौदों के क्षेत्र पूरी तरह से बदनाम हो चुके थे लेकिन उनकी कंपनी के पास भारत में रक्षा उपकरण बनाने का औद्योगिक लाइसेंस था। अडानी ने अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज का सबसे बडा हिस्सा खरीदकर बाद में अडानी डिफेंस सिस्टम्स द्वारा अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज का अधिग्रहण का रास्ता साफ किया। लेकिन तकनीकी तो मूलत: ब्रिटेन के पास है। इसलिए अब सीधे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को गौतम अडानी से मिलना पड़ा।

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