चाल, चरित्र और चेहरा शर्मिंदा !

लेख

अजय भट्टाचार्य
करीब
एक महिना पहले झारखण्ड के दुमका स्थित जरुवाडीह मोहल्ले में अपने घर में सोई अंकिता को 5 बजे पड़ोस के शाहरुख हुसैन ने खिड़की से पेट्रोल डालकर आग में झोक दिया था। पांच दिन इलाज के बाद उसने दम तोड़ दिया था। घटना झारखण्ड में हुई थी इसलिए राष्ट्रीय महिला आयोग तुरंत सक्रिय हुआ और आयोग की चेयरमैन के आदेश पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अवर सचिव शिवानी डे और क़ानूनी सलाहकार शालिनी सिंह दिल्ली से दुमका पहुंचीं। घर के सदस्यों से घटना की जानकारी ली। जिस कमरे में अंकिता के साथ घटना हुई थी।
संयोग देखिये कि इस घटना के एक महीने बाद उत्तराखंड के देहरादून में भी एक 18 साल की लड़की अंकिता की हत्या होती है और इस घटना पर राष्ट्रीय महिला आयोग मौन है। लखीमपुर खीरी में दो दलित बच्चियों को सामूहिक बलात्कार के बाद पेड़ से लटकाकर मर दिया जाता है, राष्ट्रीय महिला आयोग को जाँच की जरूरत नही लगती। एक ही तरह के अपराध होने के बावजूद आयोग का नजरिया अलग-अलग क्यों ? क्योंकि झारखण्ड में चाल, चरित्र और चेहरे का ढोंग करने वाली भाजपा का शासन नहीं है। चरित्र के इस दोगलेपन की ताजा मिसाल देहरादून रिसोर्ट कर्मी अंकिता की हत्या में देखने को मिल रहा है।
राज्य के पुलिस प्रमुख अशोक कुमार के मुताबिक आरोपी से पूछताछ और महिला की मोबाइल चैट हिस्ट्री के आधार पर जांच से पता चला है कि उस पर रिसॉर्ट में मेहमानों को “विशेष सेवाएं” देने के लिए दबाव डाला गया था, जिसका उसने विरोध किया था। गायब होने से कुछ दिन पहले, अंकिता ने अपने करीबी दोस्त को अपनी आपबीती शेयर करते हुए व्हाट्सएप मैसेज भेजे थे।’ इससे पहले, युवती के एक फेसबुक फ्रेंड ने कथित तौर पर कहा था कि उसके दोस्त की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उसने मेहमानों के साथ यौन संबंध बनाने से इनकार कर दिया था जिसके लिए उसे 10,000 रुपये की पेशकश की गई थी। शर्मिंदगी की बात यह है कि इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी के पिता और पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्या अपने बेटे पुलकित आर्या को एक सीधा-साधा बालक बता रहे हैं। विनोद आर्या ने पुलकित आर्या के खिलाफ सभी आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि उनका बेटा निर्दोष है। वह सीधा-साधा बालक है। वह अपने काम से मतलब रखता है। मैं मेरे बेटे पुलकित और युवती के लिए न्याय चाहता हूं।
जबकि पुलकित आर्या पर 2016 में भी हरिद्वार में धारा 420, 468 के तहत धोखाधड़ी का एक मुकदमा दर्ज हुआ था। इस पर भी धृतराष्ट्र बने विनोद आर्या का कहना है कि वह कभी भी ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं रहा। दूसरा झूठ उन्होंने यह कहा कि मैंने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए भाजपा से इस्तीफा दिया है। मेरे बेटे अंकित ने भी इस्तीफा दे दिया है।‘ जबकि सच यह है कि इस कांड से नाराज जनता जब सड़कों पर उतरी तब भाजपा ने अपनी चाल, चरित्र और चेहरा बचाने के लिए पिता-पुत्र को पार्टी से बाहर किया, न कि जैसा विनोद आर्य कह रहे हैं कि उन्होंने इस्तीफ़ा दिया है। पुलकित आर्या ऋषिकेश में रिसॉर्ट चलाता है। उसमें काम करने वाली एक युवती की हत्या के आरोप में शुक्रवार को रिसॉर्ट मैनेजर सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता के साथ उसे गिरफ्तार किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीन लोगों ने कथित तौर पर लड़की की पिटाई की और उसे रिसॉर्ट के पास एक नहर में धकेल दिया।
सवाल यह है कि पुलकित द्वारा रिसोर्ट के मेहमानों को जो ‘विशेष सेवा’ उपलब्ध कराई जाती थी उसके लाभार्थी कौन थे/हैं, इसकी भी जाँच होगी या नहीं!

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