बागियों से जूझती तृणमूल कांग्रेस

समाचार

अजय भट्टाचार्य
बंगाल
में चुनावी विजय पताका फहराने वाली तृणमूल कांग्रेस को नगर पालिका चुनाव में अपने ही बागियों से जूझने में पसीने छूट रहे हैं। बंगाल के कई जिलों में तृणमूल नेता विपक्षी उम्मीदवारों के मुकाबले असंतुष्टों के खिलाफ प्रचार करने में अधिक समय दे रहे हैं क्योंकि 27 फरवरी को होने वाले 108 नगर निकायों में 100 से अधिक पार्टी विद्रोहियों ने चुनाव लड़ने या निष्कासित करने के पार्टी के अल्टीमेटम की अवहेलना करने का फैसला किया है। तृणमूल नेतृत्व ने 100 से अधिक विद्रोहियों (तृणमूल का टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं) को निष्कासित कर दिया है, जिन्होंने पार्टी के अल्टीमेटम का उल्लंघन किया है। लेकिन उनमें से बड़ी संख्या में निष्कासन के बावजूद भी मैदान में टिके हुए है। नेताओं से कहा गया है कि वे उनके साथ विपक्षी उम्मीदवारों की तरह व्यवहार करें। पार्टी की मुख्य चुनौती स्थानीय निवासियों के बीच विद्रोहियों की लोकप्रियता बन गई है जो पार्टी के वोट बैंक को खा जाएंगे। खुद तृणमूल नेता कहते हैं कि विपक्षी उम्मीदवारों से मुकाबला करना आसान है क्योंकि हम उनका राजनीतिक रूप से मुकाबला कर सकते हैं। इसलिए, हमने विद्रोहियों का मुकाबला करने के लिए और अधिक समय लगाने का फैसला किया है। बांकुरा में पार्टी ने 10 निर्दलीय को निष्कासित कर दिया है। तृणमूल की अनुशासन समिति ने अपने जिला नेतृत्व को स्पष्ट निर्देश जारी किया कि जो लोग 48 घंटे की समय सीमा के बाद चुनाव लड़ने के लिए अपने रुख पर अड़े रहे उन्हें निष्कासित करें। शनिवार को समय सीमा समाप्त हो गई। यह अल्टीमेटम तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी की ओर से आया है। जिला नेता 12 फरवरी से विद्रोहियों को चेतावनी दे रहे थे, लेकिन गुरुवार को राज्य नेतृत्व की ओर से अल्टीमेटम आया। शनिवार शाम तक, निष्कासन की संख्या 100 को पार कर गई ।\पुरुलिया में, आठ तृणमूल विद्रोहियों को पुरुलिया और झालदा में निकाय चुनाव लड़ने के लिए निष्कासित कर दिया गया है। अब तृणमूल नेता मतदाताओं को समझाएंगे कि उन्हें विद्रोहियों को वोट क्यों नहीं देना चाहिए। मतदाताओं को बताया जा रहा है कि बागी इतने स्वार्थी हैं कि उन्होंने ममता बनर्जी की बात सुनने की जहमत नहीं उठाई। कई लोगों को उम्मीद है कि विजयी होने पर उनको वापस पार्टी में ले लिया जायेगा। हालांकि ममता ने इससे इंकार किया है। इसी तरह के एक बागी उम्मीदवार का कहना है कि मैं तृणमूल का पार्षद था और इस बार निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहा हूँ। मुझे यकीन है कि पार्टी हमें चुनाव के बाद वापस ले जाएगी क्योंकि हम दीदी के अनुयायी हैं।
मालदा में ऐसे 14 उम्मीदवारों को पार्टी से हटाया गया है. उत्तर दिनाजपुर में इस्लामपुर कस्बे से पूर्व पार्षदों समेत नौ को निष्कासित कर दिया गया है। अलीपुरद्वार से छह और कूचबिहार जिले से चार लोगों को निष्कासित किया गया है। जलपाईगुड़ी जिले में, अभी तक किसी को भी निष्कासित नहीं किया गया है, क्योंकि कुछ असंतुष्टों ने, जिन्होंने नामांकन दाखिल किया था, उन्होंने घोषणा की कि वे चुनाव से दूर रहेंगे और आधिकारिक उम्मीदवारों के लिए प्रचार करना शुरू कर दिया। मालदा में चार असंतुष्टों ने पार्टी को शपथ पत्र सौंपा है कि वे पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के समर्थन में नामांकन वापस ले रहे हैं।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

Leave a Reply

Your email address will not be published.