उत्तराखंड कांग्रेस में खलबली

राजनीति राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
उत्तराखंड
कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष के ऐलान के बाद से उठा तूफान थम नहीं रहा है। पार्टी आलाकमान ने रानीखेत के पूर्व विधायक और राजपूत नेता करन माहरा को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, जबकि नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी वरिष्ठतम विधायक और दलित समुदाय से आने वाले यशपाल आर्य को दी गई है। उप नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी खटीमा से विधायक और ब्राह्मण समुदाय से आने वाले भुवन कापड़ी को दी गई है, लेकिन इन तीनों को जिम्मेदारी मिलने के बाद कई विधायक और पार्टी नेता नाराज बताए जा रहे हैं।

नाराज नेताओं सबसे बड़ा नाम पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे प्रीतम सिंह का है। उन्होंने साफ तौर पर पार्टी प्रभारी देवेंद्र यादव और महासचिव संगठन केसी वेणूगोपाल की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। प्रीतम के मुताबिक दोनों नेताओं ने विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के लिए उनके द्वारा किए गए भितरघात को जिम्मेदार करार दिया है, जबकि उन्होंने कोई भीतरघात नहीं किया है। प्रीतम सिंह ने पूरे आरोपों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है। इसके साथ ही प्रीतम ने प्रदेश कार्यकारिणी में नई नियुक्तियों के ऐलान के ठीक बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर राजनीति को और ज्यादा गरमा दिया है। यहां तक कि राजनीतिक गलियारों में प्रीतम के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने की चर्चा भी गर्म होने लगी है। हल ही में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 11 विधायकों की गैरहाजिरी भी कांग्रेस में किसी बड़ी राजनीतिक हलचल का पूर्वाभास कराती है।
नेता विपक्ष यशपाल आर्य का कहना है कि उन्हें इस तरह की नाराजगी नहीं लगती और अगर किसी को उनके नेता विपक्ष बनाए जाने से नाराजगी है, तो ये फैसला हाई कमान का है। उन्हें कोई पद की लालसा नहीं है। कांग्रेस में अबतक बड़े नेता हाई कमान के फैसले को सिर आंखों पर रखते थे, लेकिन नए प्रदेश अध्यक्ष और नेता विपक्ष को लेकर हाई कमान ने जो फैसला लिया, वो फैसला पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता विपक्ष के गले नहीं उतर रहा। गोदियाल हों या प्रीतम, खुद को नज़र अंदाज़ किए जाने से नाराज़ हैं। बताते है कि विधायकों की बैठक में प्रीतम के साथ ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, भगवानपुर से विधायक ममता राकेश, चंपावत से विधायक खुशाल सिंह अधिकारी, धालचूला से विधायक हरीश धामी, द्वाराहाट से विधायक मदन बिष्ट, पिथौरागढ़ से विधायक मयूख महर, अल्मोड़ा से विधायक मनोज तिवारी, बदरीनाथ से विधायक राजेंद्र भंडारी भी नाराज बताए जा रहे हैं। सभी नेताओं की नाराजगी के कारण भी अलग-अलग हैं।
प्रतापनगर से कांग्रेस विधायक विक्रम नेगी ने भी इस पूरे मामले में बयान दिया कि आम लोगों में संदेश गलत गया है कि गढ़वाल की उपेक्षा की गई है। नेगी चाहते थे कि गढ़वाल से भी किसी को पद दिया जाये मगर ऐसा नहीं हुआ। इस बीच चंपावत से भाजपा विधायक कैलाश गहतोड़ी के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने उपचुनाव में दमखम दिखाने की ताल ठोक दी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार हल्द्वानी पहुंचे करन माहरा ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि उपचुनाव कांग्रेस के लिए कोई चुनौती नहीं है क्योंकि पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री रहते हुए खटीमा से कांग्रेस के हाथों ही चुनाव हार चुके हैं।

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