Ukraine and up election: उप्र चुनाव में रूस-यूक्रेन युद्ध का तड़का

उत्तर प्रदेश लेख

अजय भट्टाचार्य
रूस
और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के बीच एक बार फिर दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। वैसे तो रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है और भारत अभी भी तटस्थ खड़ा है, लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रूस-युक्रेन युद्ध का प्रवेश हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान इस युद्ध को लेकर इशारों ही इशारों में कहा था कि देश को मुश्किल समय का सामना कर पड़ सकता है। इस पर राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और चुनाव में समाजवादी पार्टी के सहयोगी जयंत चौधरी ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री को नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि चुनाव बाद पेट्रोल-डीजल की कीमत में 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो जाएगी। लिहाजा जयंत चौधरी ने प्रधानमंत्री को नसीहत दी है कि खर्च पर लगाम लगाया जाए। जयंत चौधरी ने ट्वीट दागा, ” उत्तर प्रदेश के चुनाव के बाद जब पेट्रोल-डीज़ल के भाव सीधा 10 रुपय बढ़ाए जाएंगे, तब जो परिस्थिति बनेंगी, उसकी योजना आज बननी चाहिए। मोदी सरकार को तेल पर शुल्क घटाने पड़ेंगे। साथ ही बजट में जो विकास के लक्ष्य रखे हैं, वो संभव नहीं… व्यय पर लगाम लगाना आवश्यक है!!”
एक अन्य ट्वीट में जयंत चौधरी ने लिखा, ” ”रूस-यूक्रेन टकराव और इसका क्रूड और अन्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर होने वाले असर को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को वृद्धि अनुमान, मुद्रास्फीति और ब्याज दरों पर रुख की समीक्षा करनी चाहिए। भारत सरकार को व्यर्थ के खर्चे (सेंट्रल विस्टा) को रोककर तेल उपभोक्ताओं को राहत देनी चाहिए।’ दरअसल रूस द्वारा यूक्रेन के हमले के बाद ही मॉस्को शेयर मार्किट में 45 फीसदी की गिरावट हुई।. इस संघर्ष का असर भारत समेत तमाम पूँजी बाजार पर देखने को मिल रहा है। इस बीच भारत में यूक्रेन के राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है।उनका कहना है कि विश्व में शांति सिर्फ पीएम मोदी ही ला सकते हैं। यूक्रेन के राजदूत ने भारत से गुहार लगाई है कि वह रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से बात करें और दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के संकट से बाहर निकाले।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
रूस-यूक्रेन युद्ध न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में आर्थिक हित प्रभावित होंगे। रूस पर व्यापक प्रतिबंधों की घोषणा का असर ग्लोबल अथव्यवस्था पर हो सकता है। जहाँ तक देश के आर्थिक हित का प्रश्न है वित्त वर्ष 2022 के पहले नौ महीनों में 2.5 बिलियन डॉलर के निर्यात और 6.9 बिलियन डॉलर के आयात के साथ रूस भारत का 25 वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। रूस को भारत के प्रमुख निर्यात में मोबाइल फोन और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं जबकि रूस से भारत का प्रमुख आयात कच्चा तेल, कोयला और हीरे हैं। भारत से निर्यात की जाने वाली खास वस्तु चाय है। भारत का यूक्रेन को निर्यात अप्रैल-दिसंबर की अवधि में फार्मास्यूटिकल्स और मोबाइल फोन के नेतृत्व में लगभग 372 मिलियन डॉलर था, जबकि लगभग 2.0 बिलियन डॉलर के आयात में सूरजमुखी तेल और यूरिया का प्रभुत्व है। इस वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में दोनों देशों को कुल निर्यात भारत के निर्यात का एक प्रतिशत से कम रहा। कच्चे तेल सहित रूसी निर्यात पर प्रतिबंधों को निर्यात की संभावना के रूप में देखा जाता है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही आठ साल के उच्च स्तर पर हैं और गुरुवार को $ 100 प्रति बैरल की सीमा को पार कर गई हैं। युद्ध के मद्देनजर निर्यातक दोनों देशों के आदेशों के निष्पादन में देरी कर रहे हैं क्योंकि संघर्ष के दौरान शिपमेंट फंस सकता है। रूस को भारत का निर्यात अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद बड़े पैमाने पर निर्बाध रूप से जारी रह सकता है, संयुक्त राष्ट्र से संभावित प्रतिबंधों का इस क्षेत्र में निर्यात पर अधिक महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। रूस के राष्ट्रपति वाल्दिमिर पुतिन द्वारा गुरुवार को पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में “विशेष सैन्य अभियान” को अधिकृत करने के बाद अमेरिका ने पहले ही प्रतिबंधों की पहली किश्त में वीईबी (रूस के राज्य विकास बैंक) और रूसी सैन्य बैंक को लक्षित प्रतिबंधों की घोषणा की है। .इस क्षेत्र में निर्यात के पैमाने को देखते हुए, निर्यातक वैश्विक व्यापार में समग्र सुधार पर संघर्ष के प्रभाव के बारे में अधिक चिंतित हैं। चिंता यह है कि युद्ध का वैश्विक प्रभाव पड़ेगा और इस समय कोई भी झटका वैश्विक व्यापार के सामान्यीकरण की प्रक्रिया में देरी करेगा।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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