नई पारी की तैयारी में जुटीं उमाभारती

राजनीति राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
2019
के लोकसभा चुनावों के बाद हाशिये पर रख दी गयीं मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती फिर सक्रिय हो गई हैं। अगले साल मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं और उमाभारती लोगों से लगातार मिल रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने शराब बंदी के खिलाफ मुहिम तेज कर दी है। हाल ही में उन्होंने शराब दुकान में तोड़फोड़ तक कर डाली। उमा भारती की बढ़ी सक्रियता से यह अंदाज लगाया जा रहा है कि अब 2023 में विधानसभा या 2024 के लोकसभा चुनाव में उमाभारती अपनी भूमिका तय कर रही हैं। उमा भारती ने 2024 में मध्य प्रदेश से लोकसभा चुनाव लड़ने का संकेत दिया था। हालांकि जाहिर नहीं किया किया कि कहाँ से लड़ेंगी। 1989 से 1998 तक 4 बार खजुराहो से लोकसभा के लिए चुनी गई उमाभारती 2003 में मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं। 2014 में उमा भारती ने उत्तर प्रदेश के झांसी से चुनाव जीता था। देखा जाये तो मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में 2003 में उमा भारती ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी लेकिन लगभग 8 महीने से ज्यादा इस पद पर नहीं रह पाई। अगस्त 2004 में कर्नाटक के हुबली की एक अदालत ने उमा के खिलाफ वारंट जारी कर दिया था। यह मामला साल 1994 में स्वतंत्रता दिवस के दिन हुए दंगे का था जिसमें पांच लोग मारे गए थे। इसके बाद उमा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और बाबूलाल गौर ने मध्य प्रदेश की गद्दी संभाली थी। और उसके बाद से अब तक उमा भारती को मुख्यमंत्री पद पर वापसी का मौका नहीं मिला। 2004 में उमा भारती ने वरिष्ठ भाजपा नेता बाबूलाल गौर को खडाऊं मुख्यमंत्री बनाया तब गौर से बाकायदा गंगाजल पर शपथ दिलाई थी कि वे उनके कहने पर मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे। कुछ ही समय बाद उमा भारती के खिलाफ मुकदमा खारिज हो गया। जब उमा भारती ने बाबूलाल गौर को इस्तीफा देने के लिए कहा तब बाबूलाल गौर ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर 2004 में उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ खुलेआम बोलने के लिए भाजपा से निकाल दिया गया था। जिसके बाद नवंबर 2005 में पार्टी ने फैसला बदल दिया। लेकिन इस दौरान उमा ने शिवराज को मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले के खिलाफ बगावत की थी। और इसके एक महीने बाद उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी हटा दिया गया। इसके लगभग 6 साल बाद तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी उन्हें वापस पार्टी में तो ले आए लेकिन तबसे ही उन्हें मध्य प्रदेश की राजनीति से दूर ही रखा गया है। पिछले दिनों छतरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उमा भारती का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उमा भारती ने इशारों में मुख्यमंत्री शिवराज पर निशाना साधते हुए कहा था कि सरकार मैं बनाती हूं, लेकिन चलाता कोई और है। जब ललितपुर सिंगरौली रेल परियोजना का शिलान्यास हुआ तब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी। रेल परियोजना के शिलान्यास के वक्त मैं भाजपा से बाहर थी। लेकिन तब न तो कांग्रेस वालों ने उनका नाम लिया और न ही भाजपा वालों ने। अब केन बेतवा का शिलान्यास होगा तो उन्हें मंच पर जगह नहीं मिलेगी क्योंकि मौजूदा वक्त में न तो वे सांसद हैं और न ही विधायक। राजमाता विजयाराजे सिंधिया के सानिध्य में राजनीतिक सफर शुरू कर 1984 में 25 वर्ष की अवस्था में उमा भारती ने अपना पहला लोक सभा चुनाव लड़ा था पर कामयाब नहीं हो पायीं। लेकिन सन 1989 में वे खजुराहो से दोबारा चुनाव लड़ी और कामयाबी हासिल की। जिसके बाद 1999 में राजधानी भोपाल से उन्होंने चुनाव जीता और अटल बिहारी वाजपयी के नेतृत्व वाली सरकार में मानव संसाधन विकास, पर्यटन, कोयला खदान, युवा कल्याण और खेल कूद मंत्रालय का प्रभार दिया गया। उमा भारती में ‘राम जन्मभूमि आन्दोलन’ में प्रमुख भूमिका निभाई थी। उन का दिया हुआ नारा ‘रामलला हम आयेंगे, मंदिर वही बनायेंगे’ काफी प्रचलित हुआ था। उनके धार्मिक परिप्रेक्ष्य के चलते जो उन्होंने किया वो बिलकुल की आश्चर्य की बात नहीं थी। खजुराहो सीट से फिलहाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, भोपाल से प्रज्ञा सिंह ठाकुर और झांसी सीट से अनुराग शर्मा सांसद हैं। ऐसे में उमा भारती को चुनाव लड़ना है तो उन्हें अपने लिए एक नई सीट तलाश करनी होगी।

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