UP Election 2022: भाजपा का मिशन उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश लेख

अजय भट्टाचार्य
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह चुनावी मोड में है और सारा ध्यान पूर्वांचल पर है। वाराणसी से अमित शाह की बैठक से शुरू चुनावी अभियान एक्सप्रेस वे के उद्घाटन तक जारी है। सड़कों पर राज्य परिवहन की बसें दिखें न दिखें पर हवाई जहाज जरुर देखे जा सकते हैं। इस हवाई जहाजों को दिखाने के लिए सरकारी बसें सरकारी खर्चे पर सरकारी कार्यक्रम दिखाने के लिए जनता को ढोकर लाने में इस्तेमाल की जा रही हैं। यही अगर किसी गैर भाजपा शासित राज्य में होता तो पूरी पार्टी सरकारी फिजूलखर्ची पर छाती पीट-पीटकर असमान सिर पर उठा लेती।
उप्र का किला फिर से कैसे फतेह किया जाए इसको लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वाराणसी में करीब 700 लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए एक घंटे की लंबी बैठक की।
इस चुनाव को पार्टी सभी चुनावों का “बाप” मान रही हैं। बैठक में शाह सभी तरह की भूमिका में थे और राज्य के कुछ नेताओं को कड़ी फटकार भी लगाई, जिनकी योजना उन्हें असंतोषजनक लगी। गौर करने वाली बात है कि शाह ने कुछ हफ्ते पहले दिए अपने बयान को दोहराया- कि 2024 के आम चुनाव में पार्टी को फिर से सत्ता दिलाने के लिए 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जीतना जरूरी है। हालांकि, इस बार शाह ने दावा किया कि आदित्यनाथ की सत्ता में वापसी न सिर्फ भाजपा बल्कि भारत के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ विधायकों का चुनाव नहीं है बल्कि मोदी की सत्ता में वापसी की चाबी है। उप्र चुनाव में 300 से ज्यादा सीटें जीतें और 2024 का रास्ता साफ करें।” बैठक में योगी आदित्यनाथ, उनके दोनों डिप्टी, केंद्रीय मंत्री व चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और शाह के खासमखास प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल भी वहीं थे।

शाह को गैर-योजनाबद्ध बैठकें नापसंद हैं, इसलिए राज्य नेतृत्व ने मोदी, योगी और शाह से जुड़ी अभियान सामग्री प्रस्तुत और चुनावी नारों और जिंगल्स को भी आजमाया गया। उनमें से एक, “सबसे बड़े लड़इया योगी”, जो कि विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओमकारा’ से प्रेरित है. इसके जरिये योगी को ऐसी शख्सियत के रूप में पेश करने की कोशिश है, जिसने सूबे को बदल दिया और अपराधियों पर नकेल कसी। योगी की भारी-भरकम छवि बनाने के लिए अपने परिवार को त्यागने वाले नेता का प्रचार और कोविड प्रतिबंधों के चलते अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं होने की पटकथा भी तैयार है। राज्य में सरकार बरकरार रखने के लिए पार्टी जमकर खर्च करेगी। चुनावी जंग में भाजपा के खर्च की झलक बंगाल चुनाव में देखने को मिली ही थी। उप्र की जंग में भाजपा हर पार्टी से ज्यादा खर्च करेगी। पार्टी मोदी की अतुलनीय अपील का भी अधिक से अधिक इस्तेमाल करेगी। इसी क्रम में वे हर हफ्ते उप्र में होंगे और विकास परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाने के कम में लग गये हैं।
व्हाट्सएप के जरिये यह पार्टी को सीधे मतदाताओं तक पहुंचने का तरीका पार्टी ने बनाया है जिसका हर एक गांव में ब्लॉक प्रभारी है। विरोधियों के बारे में निराधार दावे, यहां तक कि फेक न्यूज भी बिना किसी संपादकीय फ़िल्टर के प्रसारित करना खास रणनीति का ही हिस्सा है। अपने प्रतिद्वंद्वियों को “भ्रष्ट नेताओं” के रूप में प्रचारित कर उनको उत्तर प्रदेश को लूटने वाला बताना इस प्रचार का मुख्य हिस्सा है। प्रियंका गांधी वाड्रा और उनकी कांग्रेस पार्टी की चुनौती फिलहाल भाजपा के लिए एक्सीडेंटल इलेक्शन टूरिस्ट बताकर खारिज करने तक सीमित है। अब तक योगी सरकार पर चुप्पी साधे रहीं मायावती और बसपा को नजरअंदाज किया जाएगा। संभवत: यह भाजपा की बी टीम होने के सिद्धांत का प्रतिफल है। मिशन उत्तर प्रदेश 2022 के लिए बीजेपी तैयारी में जुटी हुई और जिन्ना से लेकर तमाम ऐसे मुद्दे हवा में तैरने लगे हैं जिनकी परछाईं में भूख, गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा, महंगाई, किसानों के मुद्दे, लड़खड़ाती स्वास्थ्य सेवाओं और कोविड की भयानक यादें छिप जाएँ। क्योंकि इन क्षेत्रों में कुछ काम किया हो तभी न बतायेंगे! बाकी जय-जयकार के लिए गोदी मीडिया तो है ही।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

Leave a Reply

Your email address will not be published.