UP Election 2022: सधे कदम से आगे बढ़ रही है सपा

उत्तर प्रदेश फीचर

अजय भट्टाचार्य
उत्तर प्रदेश
विधानसभा चुनाव के लिए समीकरण बिठाने में जुटी समाजवादी पार्टी जाटलैंड में जीत के फार्मूले पर सधे हुए कदमों से आगे बढ़ रही है। पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच दो घंटे लंबी मुलाकात इसी रणनीति का हिस्सा थी। पश्चिमी उप्र में रालोद की भूमिका हमेशा से अहम रही है। किसान आंदोलन के साथ ही चौधरी अजीत सिंह की कोरोना से मौत की सहानुभूति भी जयंत के साथ होगी। इसलिये अखिलेश और जयंत की जुगलबंदी से भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरेगी। विवादित कृषि कानूनों को वापस ले कि घोषणा को भाजपा टर्निंग पॉइंट मान रही थी/है, मगर वास्तविकता यह है कि किसानों का दिल्लीशाही और राज्य सरकार के प्रति गुस्सा कम नहीं हुआ है। यही कारण है लखनऊ में किसान नेता राकेश टिकैत के आने पर उन्हें घसीटकर ले जाते योगी का कार्टून सोशल मीडिया पर वायरल करने वाली भाजपा और पूरी राज्य सरकार 22 नवंबर को लखनऊ में किसान रैली को रोकनेसे बचती दिखी। क्योंकि किसान को और नाराज करना भाजपा के लिए घातक हो सकता है।
2022 के विधानसभा चुनाव में किसी भी बड़े दल से गठबंधन से इंकार कर छोटे-छोटे दलों को साथ लेकर आगे बढ़ रहे अखिलेश यादव अब तक 12 छोटे दलों से गठबंधन कर चुके हैं। इनमें केशव देव मौर्य के महान दल, डा. संजय सिंह चौहान की जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट), शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी शामिल हैं। ऐसा माना जा रहा है कि सपा-रालोद गठबंधन से जाट और मुस्लिम एक साथ होकर वोट करेंगे तो पश्चिमी उप्र की कई सीटों पर सियासी समीकरण बदल सकता है।

इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह कल ही अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले हैं और इस मुलाकात को लेकर सियासी जुगाली शुरू हो गई है। ‘जनेश्वर ट्रस्ट’ दफ्तर में. दोनों के बीच करीब एक घंटे तक मुलाकात चली। संजय सिंह और अखिलेश यादव के बीच हाल के दिनों में हुई यह तीसरी मुलाकात थी। इससे पहले सोमवार को मुलायम सिंह के जन्मदिन के मौके पर भी दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई थी। तब उन्होंने मुलायम सिंह को गुलदस्ता भेंट करते हुए अपनी तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘भारतीय राजनीति के पुरोधा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नेता जी माननीय मुलायम सिंह यादव जी को जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं. लखनऊ स्थित उनके आवास पर मुलाक़ात कर उनके दीर्घायु की कामना की।’ इससे पहले अखिलेश के जन्मदिन पर संजय ने अखिलेश पर अरविन्द केजरीवाल में समानताओं पर लंबा ज्ञान बांटा था। हालांकि अखिलेश यादव या संजय सिंह की तरफ से अभी तक आप और सपा के बीच किसी तरह के गठजोड़ की बात नहीं कही गई है और इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट की ही संज्ञा दी जा रही है। हालांकि सियासी जानकारों का कहना है कि इन शिष्टाचारिक भेंटों से ही गठबंधन की राहें खुलती हैं। जहाँ तक रालोद से सीटों के बंटवारे को लेकर सवाल है, खबर है कि 36 सीटें रालोद को देने पर सपा में रजामंदी हुई है जिनमें 30 सीटों पर रालोद के उम्मीदवार रालोद के ही झंडे-डंडे तले चुनाव लड़ेंगे और 6 उम्मीदवार होंगे तो रालोद के लेकिन झंडा-डंडा सपा का होगा। इस बीच एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा है वह है समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और कवि कुमार विश्वास की। ये दोनों लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सपा नेता रामगोपाल यादव की पुस्तक ‘राजनीति के उस पार’ के विमोचन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान मुलायम अपने बगल में बैठे कुमार विश्वास के कानों में कुछ कहते नजर आए। मुलायम सिंह ने कुमार विश्वास को सपा में शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि इस पर विश्वास की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने मंच से बस इतना कहा कि वह अब किसी पार्टी में नहीं हैं। यह सबकुछ जब हो रहा था तब अखिलेश यादव भी वहीं मंच पर मौजूद थे। मगर मंच पर मौजूद मुलायम सिंह यादव के गुरू उदय प्रताप सिंह ने जरुर यह कहा कि नेताजी का कहना है कि कुमार किसी पार्टी में नहीं हैं तो सपा में शामिल हो जाएँ। जाहिर है अगर कुमार विश्वास सपा में शामिल होते हैं तो पार्टी की और से प्रखर पैरवी करने वाला मुख्य चेहरा हो सकते हैं।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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