UP election 2022: उन्नाव में अखिलेश ने उतारे डॉक्टर- इंजीनियर उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश राजनीति

रईस खान
नतीज़े
कुछ भी हों… लेकिन उन्नाव जिले से अखिलेश यादव ने भगवंत नगर सीट से इंजीनियर अंकित परिहार और बांगरमऊ सीट से डॉक्टर मुन्ना अलवी को समाजवादी पार्टी का टिकट देकर प्रोग्रेसिव होने का परिचय दिया है. ये दोनों ही उम्मीदवार युवा और ऊर्जावान हैं. टेक्निकल और मेडिकल क्षेत्र से जुड़े ये नौजवान प्रोफ़ेसनली अपने पेशे और कारोबार से जुड़े होने के साथ साथ समाजी और सियासी हलकों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। इन दोनों का भले ही क्षेत्र अलग अलग है लेकिन निचले और पिछड़े तबके से जुड़ाव लगभग एक समान है। आम आदमी की छोटी बड़ी समस्या में या सुख दुःख में काफी समय से अपनी भूमिका निभाते रहे हैं।

हालांकि Er Ankit Singh Parihar की पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश में ‘ मिनीगांधी ‘ के नाम से मशहूर 7 बार विधायक रहे गाँधीवादी नेता दिवंगत भगवती सिंह विशारद जी, स्व. काका विजय बहादुर सिंह जी और पिता वीर प्रताप सिंह जी की अहम भूमिका रही है. और अंकित अपने पारिवारिक वरिष्ठजनों से राजनीति और नैतिकता की जो बूटी हासिल की है, उसकी बदौलत वह अबतक चुनाव में कामयाब न होने के बावजूद अपने उद्देश्यों में सफल रहे हैं. उनके इलाके और उनके क्षेत्र के अलग अलग वर्गों में उनकी अबतक लगातार पकड़ बनी हुई है।
हालांकि उनके कांग्रेस से सपा में आकर चुनाव लड़ने से कुछेक पुराने सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शुरुआती तौर पर विरोध अवश्य दर्ज कराया था लेकिन उनके प्रति जन समर्थन देखकर उन्होंने भी अब अपना रुझान बदल लिया है।
वहीं डॉ मुन्ना अलवी का पारिवारिक बैक ग्राउंड कुछ विशेष नहीं रहा है. उन्हें उनकी सरकारी टीचर रही मां और पिताजी समेत भाइयों और रिश्तेदारों का समर्थन और सहयोग मिला है. 17-18 साल से मेडिकल प्रैक्टिस के साथ साथ बांगरमऊ नगर और उसके आसपास के क्षेत्र और गांव के लोगों में एक सामाजिक और सपा के कार्यकर्ता और नेता की पहचान बनाई है. और Munna Alvi ने अपने क्षेत्र में अपने समकक्ष सभी दावेदारों को पछाड़ते हुए अपना टिकट पक्का कर लिया. और अब उनका अपने विधान सभा क्षेत्र बांगरमऊ में भाजपा के मौजूदा विधायक श्रीकान्त कटियार और कांग्रेस पार्टी की कैंडिडेट आरती वाजपेयी जैसे मजबूत नेताओं से त्रिकोणीय मुकाबला है. और अब जनता ही तय करेगी कि वो विधानसभा में किसे चुनकर भेजती है।
भले जो भी जीते लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव का काबिल कैंडिडेट चुनने फैसला काबिले तारीफ है।

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