UP election: उत्तर प्रदेश का नंदीग्राम

उत्तर प्रदेश समाचार

अजय भट्टाचार्य
उत्तर प्रदेश
विधानसभा चुनाव में दो चरण के मतदान हो चुके हैं। इन सब के बीच तीसरे चरण में करहल में भी मतदान होना है। करहल से समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा ने भी अपने मजबूत उम्मीदवार केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल को अखिलेश के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा है। करहल यादव परिवार का गढ़ माना जाता है। ऐसे में यह कहा जा रहा था कि अखिलेश यादव के लिए यहां से लड़ाई आसान हो सकती है। लेकिन भाजपा ने करहल में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कुल मिलाकर देखें तो भाजपा करहल में उसी रणनीति के साथ काम कर रही है जिस रणनीति के तहत 2021 के बंगाल चुनाव में नंदीग्राम में काम किया गया था। नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था। ममता बनर्जी की पार्टी पूरे बंगाल में तो शानदार तरीके से जीत हासिल करने में कामयाब हुई। लेकिन नंदीग्राम में ही ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ गया था। करहल में भी ठीक इसी तरह अखिलेश यादव के सामने भाजपा चौतरफा रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है। परसों करहल में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार करने पहुंच गए थे। कल योगी आदित्यनाथ भी करहल में गरज रहे थे। इससे पहले भाजपा उम्मीदवार पर हुए कथित हमले को लेकर भी जबानी जंग भी छिड़ चुकी है।दूसरी ओर बेटे अखिलेश यादव के लिए भी मुलायम सिंह यादव परसों चुनावी प्रचार में उतरे थे। भले ही करहल समाजवादी पार्टी के लिए गढ़ रहा हो। लेकिन मुकाबला चुनौतीपूर्ण देखते हुए मुलायम सिंह यादव का चुनाव प्रचार करने उतरे थे। यादव ने कहा कि किसान, नौजवान और व्यापारी तीनों मिलकर देश को मज़बूत करेंगे। लोग भी बड़ी उम्मीद से यहां आए हैं। लोगों की संपन्नता, किसानों की पैदावार बढ़ाने के लिए सपा सरकार काम करेगी। यह सिर्फ सपा कर सकती है और कोई पार्टी नहीं।
करहल सीट मैनपुरी जिले में आती है। 1993 से अबतक एक बार समाजवादी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। जब 2002 में भाजपा के सोबरन सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को हराया था। करहल सीट पर मतदाताओं की संख्या 371000 है। लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा मतदाता यादव हैं। यादव मतदाताओं की संख्या 144000 के आसपास है। इसका मतलब साफ है कि कुल वोटर्स के 38% हिस्सा यादव का हैं। 2017 में जब भाजपा की लहर थी तब भी यहां चुनाव में 5 में से 4 सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी। नंदीग्राम और करहल में फर्क यह है कि नंदीग्राम ममता बनर्जी का नहीं बल्कि सुवेंदु अधिकारी का गढ़ था। ममता ने वहां कड़ी टक्कर दी और मात्र 1600 मतों से हार गईं। करहल में स्थिति विपरीत है। फिर भी चुनाव है, कुछ भी हो सकता है।
तीसरे चरण में 20 फरवरी को 16 जिलों की 59 सीटों पर मतदान होगा। पहले और दूसरे चरण की तुलना में तीसरे चरण में ज्यादा जिलों में मतदान हैं। तीसरे चरण में 16 जिलों की 59 विधानसभा सीटों वोटिंग होनी है। इस बार में 2.15 करोड़ मतदाता 627 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंग। इस चरण में सबसे ज्यादा उम्मीदवार एटा, ललितपुर जिले की मेहरौनी (सु) और महोबा जिले की सदर सीट पर भी 15-15 प्रत्याशी उतरे हैं। सबसे कम 3 प्रत्याशी करहल सीट पर हैं जहाँ सपा मुखिया अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं।

(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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