UP election news: दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग का विश्लेषण, उप्र में बनेगी सपा सरकार

उत्तर प्रदेश समाचार

अजय भट्टाचार्य
उत्तर प्रदेश
विधानसभा चुनाव पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। चुनाव मैदान में उतरे सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं और गोदी मीडिया चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के जीतने और वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दुबारा मुख्यमंत्री बनने की भविष्यवाणी कर चुका है। इन प्रायोजित सर्वेक्षणों को दरकिनार करते हुए दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग का यह मानना है कि समाजवादी पार्टी इस बार उत्तर प्रदेश में सरकार बनाएगी। नजीब जंग ने अपने विश्लेषण के आधार पर एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि पूरे चुनाव का जो नतीजा निकलेगा, उसको लेकर ये मेरे विचार हैं। चुनाव आज एक राजनीतिक युद्ध बन गया है। हर युद्ध से पहले चुनाव लड़ने की एक रूपरेखा और भूमिका बनाई जाती है। पिछले 6 महीने में सोच कर लगा कि सपा आगे रही है। भारत में सबसे कद्दावर नेता प्रधानमंत्री मोदी हैं। हिन्दी पट्टे में उनका (नरेंद्र मोदी) कोई मुकाबला नहीं है। 2014, 2017 और 2019 के चुनाव में मोदी मुख्य चेहरा थे जबकि यह चुनाव योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच में हैं। इसमें योगी, अखिलेश से आगे नहीं हैं। मोदी जी का उस पैमाने पर आगे न होने से फर्क पड़ेगा। किसान आंदोलन से किसानों का दिल टूट गया है। तरह तरह की बातें हुईं। उन्हें खालिस्तानी, आतंकवादी कहा गया। किसान पूरे देश में हैं और उसका स्वभाव दूसरे से मिलता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को तकलीफ़ हुई है और उसका असर सब पर पड़ा है।
जंग का मानना है कि गिनती में अखिलेश यादव शायद आगे होंगे। किसानों की जिन्दगी पिछले 3 सालों में पीछे हो गई है। आवारा पशुओं ने भी किसान पर प्रभाव डाला है। पूरे उप्र में यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। प्रदेश में पिछले दो साल में बेरोजगारी बढ़ी है और बेरोजगारों की संख्या 12.5 लाख से बढ़कर 35 लाख हो गई है। दुनिया देख रही है कि उसके हम उग्र लोग आराम से हैं, लेकिन इन नौजवानों के पास कुछ नहीं है। यही मुद्दा उनको और उनके परिवार को प्रभावित कर रहा है। कोविड की दूसरी लहर को लोग भूले नहीं हैं। बहुत लोगों की मौत हुई है। कोरोना की दूसरी लहर में लोगों ने गंगा के दृश्य देखे थे। जिन लोगों ने अपने माता-पिता या अन्य परिजनों को खोया है वे उस दर्द को अभी तक भूल नहीं पाए हैं। जंग के मुताबिक उप्र में भाजपा की हार का कारण योगी द्वारा अपने अच्छे काम का जिक्र कम करके प्रचार में उन्होंने जिन्ना और टोपी की बात कही। पूरे हिंदुस्तान में भ्रम है कि मसलमान एकतरफा वोट करता है। 40-50 साल पहले मुसलमान कांग्रेस को वोट करते थे। बाबरी कांड के बाद मुसलमानों का वोट सपा को गया। इसके बाद बसपा और सपा सब में मुसलमान वोट बंटा है। इस बार मुसलमानों का 75-80 प्रतिशत वोट सपा की ओर जा रहा है। उसकी वजह सबको पता है। किसानों के मुद्दे के बाद सपा की स्थिति सुधरी है। छह-सात महीने पहले सबको लगा था कि अखिलेश मेहनत नहीं कर रहे हैं, लेकिन अखिलेश बहुत सोच कर लड़ाई कर रहे थे। उन्होंने पिछड़ों को जोड़ने का काम किया। 2019 और 2017 में पिछड़ों ने भाजपा को वोट किया था, लेकिन अब यह वर्ग भी अखिलेश की तरफ सरक रहा है। नजीब जंग के मुताबिक अगर 25-26 प्रतिशत पिछड़ों का वोट सपा की तरफ सरका तो भाजपा के हाथ से चुनाव निकल जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि सपा मुखिया ने मुस्लिम और यादव (एमवाई) समीकरण को भी अलग किया है। इसलिये उच्च जाति का वोट काफी हद तक अखिलेश की तरफ जाएगा। पूरे उत्तर प्रदेश में यह जनधारणा है कि योगी के राजपाट में ठाकुरवाद ज्यादा फला-फूला है। लाभार्थियों वाली बात काफी हद तक सच है, लेकिन लोगों को पता है जो लाभ आप दे रहे हैं वह अगली सरकार भी देगी। जिनको लाफ मिल गया है वो वापस नहीं जाएगा। अखिलेश ने महिलाओं की पेंशन फिर से शुरू करने की बात की है। महिलाओं को 1000 – 2000 दे रहे हैं तो वो खुश हो जाएंगी। और राशन के साथ पैसा मिलेगा तो इससे ज्यादा अच्छा क्या होगा। लाभार्थियों को पता है ये अगली सरकार भी करेगी। लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि प्रधानमंत्री मैदान में आएंगे तो चुनाव में फर्क पड़ सकता है। वैसे कानून व्यवस्था के मुद्दे पर नजीब योगी प्रशासन को बेहतर बताते हैं मगर अकेले इस बिना पर भाजपा को ज्यादातर लोग वोट देंगे ही इसमें संदेह है।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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