UP Police: कानून के राज की अर्थी उठती उप्र पुलिस

उत्तर प्रदेश लेख

अजय भट्टाचार्य
उत्तर प्रदेश
में कानून के राज की अर्थी निकलने की शर्मनाक घटना सामने आई है। गोरखपुर में मनीष गुप्ता हत्याकांड से सबक न सीखते हुए पुलिस कि जबरन वसूली और उलटे-सीधे मुकदमों में लोगों को फंसाने का सिलसिला जारी है। ताजा मामला कानपुर के एक परिवार के साथ घटित हुआ है।
आरोप है कि बीबीए छात्र, उसके मामा व दोस्तों को उठाकर फर्जी मुकदमें में जेल भेजने की धमकी देकर 40 लाख रुपये वसूले थे। दबिश के दौरान घर से जेवरात भी लूट ले गए थे। शिकायत होने पर तीनों के खिलाफ गोमती नगर थाने में जुआ अधिनियम में एफआईआर दर्ज करके जेल भेजा था। कानपुर और लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में सुनवाई नहीं होने पर पीड़ित ने कोर्ट की मदद से आरोपी पुलिस कर्मियों के ख्रिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
कानपुर स्थित शास्त्री नगर के रहने वाले मयंक बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं। 24 जनवरी 2021 की शाम अपने दोस्त जमशेद व आकाश गोयल के साथ काकादेव में चाय पी। जब मयंक और आकाश वहां से घर के लिए चले तो डबल पुलिया के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार (यूपी 32 एलई 2282) और बिना नंबर वाली नीले रंग की टाटा सूमो गोल्ड वहां आकर रुकी। इसमें डीसीपी पूर्वी लखनऊ की क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मी मौजूद थे। पुलिसकर्मी मयंक व आकाश गोयल को कार में उठा ले गए। लखनऊ कैंट थाने में मारा पीटा. फिर यहां से हजरतगंज में मयंक के मामा के घर जाकर दुर्गा सिंह को उठा लिया। फिर कोचिंग संचालक शमशाद को लेकर कैंट थाने आते हैं। टॉर्चर करने के बाद 25 जनवरी के तड़के करीब साढ़े तीन बजे इन सभी को लेकर पुलिसकर्मी मयंक के घर पर दबिश देते हैं। आरोप है यहां से तीस हजार रुपये की नकदी व एक हार का सेट ले जाते हैं। इसके बाद फिर वे सभी लखनऊ चले जाते हैं। पीड़ितों के मुताबिक, घर में डाका डालने के बाद बाद में मयंक के परिवार वालों से आरोपी पुलिस वालेछोड़ने के बदले में 1 करोड़ रुपये की मांग की थी। इसके बाद 40 लाख रुपये में मामला रफा-दफा करने की बात तय होती है। उसी दिन सुबह परमट चौराहे पर पुलिसकर्मी यह रकम लेते हैं। पीड़िता का आरोप है कि जब इसकी शिकायत तत्कालीन डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह से की जाती है तो इसकी भनक आरोपी पुलिसकर्मियों को लगती है, जिसके बाद आरोपी पुलिसकर्मी साजिश के तहत दुर्गा सिंह, मयंक सिंह, शमशाद अहमद, मुस्ताक, आकाश गोयल पर गोमती नगर जुआ अधिनियम के तहत केस दर्ज करवाकर 23 लाख रुपये की रिकवरी दिखाते हैं। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दरोगा रजनीश वर्मा, सिपाही देवकी नंदन, संदीप शर्मा, नरेंद्र बहादुर सिंह, राम निवास शुक्ला, आनंद मणि सिंह, अमित लखेड़ा व रिंकू सिंह पर डकैती, धमकी देने, गाली गलौज करने समेत अन्य गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर दर्ज करने के बाद काकादेव इंस्पेक्टर ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना से एक हफ्ते पहले गोरखपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच ने सर्राफा व्‍यापारियों से 35 लाख रुपए के सोने-चांदी और नकदी की लूट करने वाले बस्‍ती में तैनात दारोगा और दो सिपाहियों समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान बस्‍ती जिले के पुरानी बस्‍ती थाने में तैनात और गोरखपुर के थाना सिकरीगंज के जगरनाथपुर के रहने वाले गैंग सरगना उप निरीक्षक धर्मेन्‍द्र यादव, पुरानी बस्‍ती थाने में तैनात मऊ जिले के थाना सराय लखनसी के रैकवार डीह गांव के रहने वाले सिपाही महेन्‍द्र यादव, गाजीपुर जिले के जंगीपुर थानाक्षेत्र के अलवरपुर के रहने वाले सिपाही संतोष यादव के रूप में हुई थी। पूछताछ में पिछले साल 29 दिसंबर को शाहपुर इलाके में स्‍वर्ण व्‍यवसाई से लूट की घटना को अंजाम देने की बात भी इस गैंग ने स्‍वीकार की। यह दो घटनाएँ किस्से भर नहीं हैं। बल्कि सत्ता द्वारा मिले कथित सरंक्षण का परिणाम हैं जिसमें प्रदेश को अपराधमुक्त करने के लिए पुलिस को खुली छूट दी गई है। यह खुली छूट किसी को भी अपराधी बनाकर वसूली और लूट का जरिया बन गई है। गोरखपुर के होटल में मनीष गुप्ता पुलिस की इसी वसूली का शिकार हुए और उनकी जान तक ले ली गई। आज हालत यह है कि मनीष के दोस्त गवाही देने के लिए लखनऊ जाने में डर रहे हैं क्योंकि मनीष गुप्ता का हत्यारा दरोगा पुलिस अधिकारी से राजनेता बने एक पूर्व मंत्री का दामाद लगता है। यह नेता किसी समय मुंबई का पुलिस कमिश्नर हुआ करता था।

(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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