केंद्रीय फैसले के खिलाफ भाजपा में उठने लगी आवाज

लेख समाचार

अजय भट्टाचार्य
भाजपा
के बाहुबली सांसद अर्जुन सिंह ने कच्चे जूट की वाजिब मूल्य सीमा (6500 रुपये प्रति क्विंटल) रद्द करने को लेकर केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल को कड़ा पत्र लिखा था जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गयी है। उन्होंने कहा है कि बंगाल के जूट उत्पादक किसान संकट के दौर से गुजर रहे हैं। केंद्र के इस कदम से 40 लाख पटसन किसानों पर असर पड़ रहा है। इस मुद्दे पर पहले ही अर्जुन सिंह ने पीयूष गोयल और जूट कमिश्नर मलय चक्रवर्ती पर हमला बोला था।
उन्होंने कहा था कि इस संबंध में वह 4 राज्यों के मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे। इस बारे में अर्जुन सिंह ने बताया कि आज ही वह 4 राज्यों असम, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी भेजेंगे। यहां उल्लेखनीय है कि आगामी 4 तारीख को तृणमूल कांग्रेस के श्रमिक यूनियन आईएनटीटीयूसी की ओर से जूट कमिश्नर के कार्यालय का घेराव किया जाएगा। ऐसे में अर्जुन सिंह इसमें शामिल होंगे या नहीं, पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अगर उनकी ओर से बुलाया गया तो जरूर शामिल होंगे। हालांकि इसके लिए बीएमएस यानी भाजपा के ट्रेड यूनियन को आमंत्रित करना होगा। वहीं इस संबंध में तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर राय ने कहा है कि अगर अर्जुन सिंह चाहे तो वह आईएनटीटीयूसी के प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। इसमें राजनीति की कोई बात नहीं है, ये जनहित का मामला है।
केंद्रीय मंत्री को पत्र में 7 दिनों में निर्णय लेने की अपील
इधर, केंद्रीय कपड़ा मंत्री को गत 19 तारीख को दी गयी चिट्ठी में अर्जुन सिंह ने कहा है कि पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार द्वारा जूट श्रमिकों और कृषकों के बीच ये धारणा बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि जूट की अधिकतम कीमतों का निर्धारण करके केंद्र सरकार बंगाल सरकार से राजनीतिक प्रतिशोध ले रही है। जमीनी स्तर पर इस कारण जूट मिल श्रमिकों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इस धारणा को बल देने का कार्य जूट से संबंधित अधिकारी व जूट व्यापारी एक षड्यंत्र के रूप में तृणमूल के प्रभाव में करने में जुटे हुए हैं। पश्चिम बंगाल में आपके निर्णय कृषकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। इस उद्योग से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से करीब ढाई से तीन करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। पत्र में उन्होंने लिखा है कि बैरकपुर में करीब 20 जूट मिलें हैं, इस निर्णय को लेकर मिल मालिकों में काफी रोष है। ये निर्णय अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। अनुरोध है कि आप तुरंत जूट श्रमिकों और किसानों के हितों में निर्णय लें। अंत में उन्होंने लिखा है कि यदि आप अपनी नीतियों और अधिकारियों की सलाह पर कृषकों और जूट श्रमिकों के हित में निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं तो कृपया 7 दिनों के भीतर मुझे सूचित करें ताकि मैं भी दुविधाओं से बाहर निकलकर एक जनप्रतिनिधि होने के नाते अपनी जनता के साथ खड़े होने का धर्म निभा सकूं।

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