मुस्लिमों को मताधिकार, बिहार में रार

लेख समाचार

अजय भट्टाचार्य
बिहार
में मुसलमानों को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है। भाजपा के एक विधायक ने मुसलमानों के मताधिकार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इस पर. न सिर्फ विपक्ष बल्कि भाजपा नेतृत्व ने भी अपने विधायक को चेतावनी दी है। बिस्फी से बीजेपी के विधायक हरि भूषण ठाकुर ने पिछले दिनों कहा था कि मुसलमानों के मतदान के अधिकार पर रोक लगनी चाहिए। विधायक हरि भूषण ठाकुर अपने दिए इस बयान को लेकर पूरे तौर से घिर गए हैं। विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के अलावा सरकार में सहयोगी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने उन पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कार्रवाई की मांग की है। बवाल बढ़ने पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने नाम लिए बिना अपनी पार्टी के नेताओं को खुली चेतावनी दी है। जायसवाल ने लंबा-चौड़ा फेसबुक पोस्ट लिख कर अपनी पार्टी के विधायकों और नेताओं को अनर्गल और बेवजह की बयानबाजी न करने की नसीहत दी है। उन्होंने लिखा, संविधान ने प्रत्येक भारतीय नागरिक को कई अधिकार दिए हैं, जिनमें ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ की गूंज आजकल सबसे अधिक सुनाई देती है। अभिव्यक्ति की आजादी यानी बोलने की स्वतंत्रता। स्वतंत्रता ताकत होती है, लेकिन ताकत के साथ जिम्मेवारियां भी साथ आती है। जिम्मेवारी के बिना ताकत को अराजकता में बदलने में देर नहीं लगती। कुछ लोग संविधान प्रदत इस अधिकार का उपयोग के बजाए दुरूपयोग करने को ही अपनी श्रेष्ठता समझने लगे हैं। बोलने की आजादी की आड़ में बेलगाम बयान देना फैशन सा हो चला है। दुर्भाग्य से विपक्षी दलों द्वारा शुरू किये गये इस ट्रेंड के शिकार कुछ पक्षवाले भी हो गये हैं। इस स्थिति को विशेषकर भाजपा में किसी भी कीमत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर भारतवासी का अधिकार है, जिसे कोई छीन नहीं सकता। उसमें भी जब सत्ता में परिवारवादियों के बजाए मोदी सरकार हो तो यह बात नामुमकिन हो जाती है। जो सरकार ‘सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास’ के मूलमंत्र पर काम कर रही हो, उसमें संविधान विरोधी कोई बात कहना खुद से अपनी बेइज्जती करवाने के बराबर है। जब आप जनप्रतिनिधि हों तो लोगों की आपसे अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं। संयम और शालीनता आपकी कथनी और करनी दोनों में झलकनी चाहिए। नहीं तो जिन ताकतों के विरोध में जनता ने आपको दायित्व दिया है, उनमें और आपमें कोई अंतर बाकि नहीं रह जाता। सच्चा राजनेता वही होता है जो जात, पात, धर्म, मजहब की उलझनों में खुद भी नहीं फंसता और समाज को भी इससे बाहर निकालने की क्षमता और मंशा दोनों रखता है। जो सरकार देश के संसाधनों पर एक खास समुदाय का पहला हक बताती थी, उसके दिन बीत चुके हैं। जनता ने उनके हाथों से छीनकर अपार बहुमत के साथ मोदी सरकार के हाथों में देश की बागडोर सौंपी है। इसीलिए जनता और उनका कल्याण ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भावावेश में भी किसी को भी अपने बयान से जनभावनाओं को आहत करने की छूट नहीं दी जा सकती। यह देश सबका है, और देश के हर नागरिक का इस पर बराबर का हक़ है। अपने बयानों से मोदी सरकार और जनता के इस आपसी रिश्ते को कमजोर करने की चेष्टा कोई भी न करें।हरि भूषण ठाकुर पहले भी कई बार विवादास्पद बयान दे चुके हैं। इनके बयान से पार्टी की किरकिरी होती है और विपक्ष को इसे मुद्दा बनाने का अवसर मिलता है। ठाकुर के ताजा बयान बयान से राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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