West Bengal: अर्पिता के चक्कर में कई और नपेंगे..!

राजनीति राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
पश्चिम
बंगाल में एसएससी घोटाला (स्कूल सर्विस कमीशन) सुर्खियों में है। पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का एक और कारनामा सामने आ रहा है। आरोप है कि पार्थ चटर्जी के सिक्योरिटी गार्ड के 10 रिश्तेदारों को भी शिक्षा विभाग में नौकरी मिल गई। एक झटके में भाई-भाभी से लेकर दामाद तक सबको सरकारी टीचर बना दिया गया। अब इस मामले की भी जांच के आदेश हाई कोर्ट ने दिए हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 10 प्राथमिक शिक्षकों को मिली नौकरी की जांच की जाए। ये दस शिक्षक मंत्री पार्थ चटर्जी के अंगरक्षक विश्वंबर मंडल के रिश्तेदार हैं। इन भर्तियों को पश्चिम बंगाल एसएससी भर्ती घोटाले से सीधे तौर पर जोड़ा जा रहा है। न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय ने राज्य स्तरीय चयन परीक्षा की उम्मीदवार बीथिका अदक की ओर से प्रस्तुत एक हलफनामे पर सुनवाई के बाद आदेश दिया है कि पार्थ चटर्जी के जिन रिश्तेदारों पर रुपये देकर नौकरी पाने का आरोप है उनसे हलफनामे लिए जाएं। कोर्ट ने सभी से अपनी नौकरी के विवरण के बारे में एक हलफनामा दाखिल करें और बताएं कि उन्हें यह नौकरी कैसे मिली। यह हलफनामा उन्हें 17 अगस्त तक जमा करना होगा।
याचिकाकर्ता ने 22 जुलाई को शिकायत की थी कि बिश्वंबर के भाई बंशीलाल मंडल और देबगोपाल मंडल, पत्नी रीना मंडल, बहनोई अरूप भौमिक, भाभी पूर्णिमा मंडल और दामाद सोमनाथ पंडित समेत उनके परिवार के अन्य रिश्तेदारों को शिक्षक की नौकरी दी गई। पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड ने उन्हें नौकरी देने के लिए ओएमआर शीट में मनमानी ढंग से हेरफेर की।
पार्थ चटर्जीपार्थ चटर्जी 3 अगस्त तक ईडी की हिरासत में हैं और उनसे कोलकाता के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में पूछताछ की जा रही है। शिक्षा विभाग के स्कैम में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी 12 शेल कंपनियां चला रही थीं और इन्हीं शेल कंपनियों के जरिए काले धन को सफेद करने का खेल चल रहा था।
ईडी के अधिकारियों को कम पहचाने जाने वाले एक अभिनेता के साथ-साथ उड़ीसा और तमिलनाडु के अलग अलग प्रॉडक्शन हाउस के लोगों के शामिल होने का शक है। मुखर्जी ने भी कई बंगाली और उड़िया फिल्मों में काम किया है। अर्पिता के जोका स्थित फ्लैट से मिले दस्तावेज संकेत देते हैं कि वह आर्थिक हेरफेर के लिए दर्जन भर मुखौटा कंपनियों का संचालन कर रही थी। ईडी उड़ीसा और तमिलनाडु में कुछ लोगों पर कड़ी निगाह रख रही है और उनसे जल्द पूछताछ की जा सकती है। ईडी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं क्या अर्पिता ने किसी फिल्म प्रॉडक्शन हाउस में निवेश किया है।
ईडी पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को जोका ईएसआई अस्पताल ले गई। लेकिन जब मेडिकल जांच के लिए अस्पताल (जोका ईएसआई अस्पताल) लाया गया, तो देखा गया कि अर्पिता मुखर्जी कार में बैठी हैं और रो रही थी। यह नजारा कार के बाहर से साफ नजर आ रहा था। वह कार से बाहर नहीं निकलना चाह रही थी, उसे व्यावहारिक रूप से मजबूर किया गया। लेकिन नीचे उतरने के बाद भी वह जमीन पर बैठ कर रोती रही। उसके बाद ईडी और अस्पताल के अधिकारी उसे अंदर खींच कर ले गये। अब इतने ड्रामा के बाद लोगों की नजर टिकी थी पार्थ चटर्जी पर लेकिन जहां उन्होंने लोगों से ताव में कहा था कि मैं क्यों मंत्री पद छोड़ुं। अब उनकी बर्खास्तगी हो चुकी है और वे बिलकुल चुप थे।
अब खबर यह है कि ईडी को अर्पिता की चार गाड़ियों की तलाश है। अर्पिता के डायमंड सिटी फ्लैट वाले घर से ये गाड़ियां गायब हैं। इनमे एक ऑडी ए4 नं. डब्ल्यूबी02 एबी 9561, होंडा सिटी नं. डब्ल्यूबी06 टी 6000, होंडा सीआरवी नं डब्ल्यूबी06 टी 6001, मर्सिडीज बेंज नं. डब्ल्यूबी02 एई 2232 शामिल हैं। अर्पिता की गिरफ्तारी के समय सिर्फ एक सफेद रंग की मर्सिडीज कार (पांचवीं) सीज की गई। इन गाड़ियों में भारी संख्या में नकदी होने की संभावना है। इन गाड़ियों की तलाश में ईडी लगातार छापेमारी कर रही है और कई सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है।

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