West Bengal news: क्या पार्थ को मिलेगा सुरक्षा कवच !

लेख

अजय भट्टाचार्य
शिक्षक
भर्ती घोटाले में गिरफ्तार बंगाल के पूर्व उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) के खिलाफ क्या सीबीआई (CBI) जांच की मंजूरी सरकार दे देगी। सीबीआई की तरफ से इस बाबत राज्य सरकार से अपील तो की गई है पर अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। एसएससी के कई अफसरों को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ भी मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी गई है।
सरकारी सेवकों, यानी मंत्रियों और अफसरों, के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 17A के तहत सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है। सरकार से अनुमति नहीं मिलने पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने विनीत नारायण (Vinit Narayan) बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (Union of India) के मामले में कहा था कि अनुमति मिलने की प्रत्याशा में निचली अदालत में मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके लिए चार माह की समयसीमा भी तय कर दी गई थी। अगर सरकार से मंजूरी नहीं मिलती है तो क्या इन सरकारी सेवकों को एक मुकम्मल सुरक्षा कवच मिल जाता है। इस बाबत शंकरा भट्ट (Shankara Bhatt) बनाम केरल (Kerala) के मामले में जस्टिस सुनील थामस ने कहा था कि पीसी एक्ट की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति जरूरी नहीं है। मसलन विश्वास भंग, फंड में हेराफेरी और आपराधिक गतिविधियों का पूर्वाभाष होता है तो मंजूरी की बाध्यता नहीं है। धारा 17ए का सुरक्षा कवच उन इमानदार अफसरों के लिए है ताकि दुर्भावना के तहत उन्हें परेशान नहीं किया जा सके। गौरतलब है कि इस मामले में पूर्व जस्टिस बाग की रिपोर्ट में पार्थ चटर्जी सहित एसएससी के अफसरों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई थी। हाई कोर्ट के डिविजन बेंच ने इस पर अपनी सहमति भी जता दी थी। बैजनाथ गुप्ता बनाम मध्यप्रदेश सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह जांच करना बेहद महत्वपूर्ण है कि क्या सरकारी सेवक ने अपनी सरकारी ड्यूटी का निर्वाह करते हुए यह किया है। दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High court) ने देवेंद्र कुमार बनाम सीबीआई के मामले में इसे और स्पष्ट करते हुए अपने फैसले में कहा था कि रिश्वत मांगना या लेना और इस मकसद से फाइल को लटकाए रखना जैसे मामले पीसी एक्ट की धारा 17 के दायरे में नहीं आते हैं। जहां अपराध का स्पष्ट पूर्वाभाष होता है वहां अनुमति लेने की बाध्यता नहीं होती है। चारा घोटाले को उसके अंजाम तक पहुंचाने वाले सीबीआई के पूर्व अतिरिक्त निदेशक उपेन विश्वास (Upen vishvas) सवाल करते हैं कि नियुक्ति कौन देता है। फिर कहते हैं राज्य में सारी नियुक्तियां तो राज्यपाल के दस्तखत से होती है। चारा घोटाले में राज्यपाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी।
फ़िलहाल सीबीआई की विशेष अदालत के आदेश पर पार्थ चटर्जी 19 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले की जांच सीबीआई कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर कर रही है। पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (wbbsc) के पूर्व अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली, डब्ल्यूबीएसएससी के पूर्व सचिव अशोक साहा और पूर्व सलाहकार एस.पी.सिन्हा की 19 अक्टूबर जेल में हैं। जिस वक्त कथित घोटाला हुआ, उस समय चटर्जी राज्य के शिक्षामंत्री थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.