जब एक साथ मंच पर आए देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ खडसे, जाने फिर क्या हुआ?

मुंबई राजनीति

न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
मुंबई।
महाराष्ट्र राजनीति के दो धुरंधर विरोधी देवेंद्र फडणवीस (Devendra fadanvis) और एकनाथ खडसे (Eknath khadse) जब एक साथ मंच पर आए तब लोगों को लगा कि, यहां जरूर कुछ ऐसी बातें होंगी जो विवाद पैदा करेंगी, लेकिन हुआ इससे एकदम विपरीत। खडसे ने फडणवीस की मौजूदगी में लोगों से क्या कहा यह हम आगे बताएंगे। पहले जान लें कि, कब और कहां कार्यक्रम था।
भगवान श्री चक्रधर स्वामी (shree chakradhar Swami) की 8वीं शताब्दी के अवसर पर आज से नासिक (Nasik) के डोंगरे छात्रावास मैदान में अखिल भारतीय महानुभाव सम्मेलन शुरुआत हुई है। बैठक अगले तीन दिनों तक चलेगी। सम्मेलन के पहले दिन आज राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मंत्री गिरीश महाजन (Girish Mahajan) और राकांपा नेता एकनाथ खडसे मंच पर पहुंचे। भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों की भीड़ में एकनाथ खडसे मंच पर अकेले थे। तो वे क्या कहेंगे? इस ओर सबका ध्यान गया।
इस बीच एकनाथ खडसे ने अपने भाषण में राजनीतिक बयानों से परहेज किया। एकनाथ खडसे ने महानुभाव पंथ की विचारधारा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम राजनीतिक विचारों को बाहर छोड़कर मंच पर आए हैं। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत महानुभाव पंथ से हुई थी।
इस बारे में एक किस्सा बताते हुए एकनाथ खडसे ने कहा, जब मैंने 1990 में पहली बार चुनाव लड़ा तो मेरे लिए बड़ी चुनौती थी। नाथभाऊ पहली बार किसी ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचित हुए थे, जहां कभी भी विपक्षी दल का कोई उम्मीदवार नहीं चुना गया था, जो कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में पिछले 50 वर्षों में नहीं हुआ है। महानुभाव पंथ को मेरी जीत पर विश्वास था और चमत्कार हुआ, मैं वहां 2300 मतों से निर्वाचित हुआ। उपरोक्त सभी मत आपके (महानुभाव पंथ) थे, इसलिए नाथभाऊ आज भी खड़े हैं।

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