क्या है “राज” के पत्र का “राज”? क्या अंधेरी विधानसभा से भाजपा नही लड़ेगी चुनाव?

मुंबई राजनीति

विजय यादव
मनसे
प्रमुख राज ठाकरे के एक पत्र के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में काफी हलचल है, लोग उस पत्र को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं और अनुमान लगा रहे हैं। कोई सराहना कर रहा तो कोई इसे भाजपा की नई दांव पेंच बता रहा है। इन्ही प्रतिक्रियाओं और कयासों को लेकर हमने भी एक विश्लेषण किया। इस दौरान राजनीतिक सूत्रों ने कई अहम जानकारियां भी दी, जिसे सुनकर संभवतः भाजपा और मनसे से आपकी सहानुभूति कुछ कम हो जाय।
राज ठाकरे ने पत्र के माध्यम से भाजपा नेता और राज्य के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की है कि स्वर्गीय रमेश लटके को श्रद्धांजलि स्वरूप इस सीट से भाजपा को चुनाव नही लड़ना चाहिए। जो मनसे शिवसेना पर कोई भी राजनीतिक हमला करने का मौका नहीं चूकती अचानक उसके मन में ऋतुजा लटके के प्रति इतनी सहानुभूति कैसे पैदा हो गई? जाहिर सी बात है, यह सवाल अंधेरी विधानसभा के मतदाताओं में ही नही बल्कि तमाम मुंबईकरों के मन में होगा।
मनसे 2014 लोकसभा चुनाव से लगातार शिवसेना या साफ तौर पर कहें तो उद्धव ठाकरे को नुकसान पहुंचाती रही है, जिसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को होता रहा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुशार भाजपा के मुंबई अध्यक्ष आशीष शेलार की मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात हुई। कहा जा रहा है कि आशीष शेलार और राज ठाकरे के बीच दादर स्थित शिवतीर्थ घर पर अंधेरी उप चुनाव को लेकर चर्चा हुई। इसके पहले राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे के बीच मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि कुछ नया होने वाला है। तर्क यह भी लगाया जा रहा था कि राज ठाकरे अंधेरी विधानसभा उप चुनाव में भाजपा उम्मीदवार मुरजी पटेल के समर्थन में उतर सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ। सीधे-सीधे एक पत्र आया। जिसमें भाजपा उम्मीदवार के चुनाव नही लड़ने की सिफारिश थी।
आइए अब बात करते हैं पत्र के पीछे के पूरे खेल की। अंधेरी विधानसभा का उप चुनाव भाजपा और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यह चुनाव आगामी मुंबई महानगर पालिका का अभी से परिणाम तय करनेवाला होगा। यही वजह है कि दोनो दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
अंधेरी विधानसभा को लेकर सभी दलों की ओर से जो अंदरूनी सर्वे कराया गया है, उसका परिणाम खासकर भाजपा उम्मीदवार के अनुकूल नहीं है। इसके साथ ही इस विधानसभा में मराठी मतदाताओं की खासी संख्या है। यहां हिंदी और गुजराती भाषी मतदाता भी बड़ी संख्या में है। इसके अलावा मुस्लिम और ईसाई वोट भी कई बूथों पर निर्णायक भूमिका में है। रमेश लटके की पत्नी के चुनाव मैदान में उतरने से ऐसा समझा जा रहा है कि मराठी मतदाताओं की सहानुभूति ऋतुजा लटके की ओर अधिक रहेगा। इस स्थिति में भाजपा को चुनाव जीतने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों की माने तो भाजपा के लिए चुनाव लड़ने से ज्यादा फायदे का सौदा चुनाव नही लड़ने से होगा। अगर भाजपा अंधेरी विधानसभा से अपना उम्मीदवार हटा लेती है तो इसका बड़ा लाभ पार्टी को आगामी मनपा चुनाव में मिल सकता है। भाजपा का लक्ष्य अंधेरी विधानसभा नही बल्कि मनपा चुनाव है। यही वजह है कि मनपा चुनाव से पहले भाजपा एकनाथ शिंदे को साथ लेकर राज्य में सत्ता परिवर्तन कर दिया। क्योंकि चुनाव में सत्ता धारी पार्टी को विपक्ष से कुछ ज्यादा ही समर्थन मिलने की संभावना रहती है। इसके साथ ही सरकारी यंत्रणा भी नियंत्रण में रहता है।
राज ठाकरे के पत्र के बाद देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा है कि, राज ठाकरे ने यह पत्र अच्छी भावना से लिखा है और हम निश्चित रूप से उनके पत्र पर विचार करेंगे।
मैं बीजेपी में अकेले फैसले नहीं ले सकता। अगर मुझे राज ठाकरे के पत्र पर फैसला लेना है तो मुझे अपनी पार्टी, सहयोगियों, वरिष्ठ नेताओं के साथ इस पर चर्चा करनी होगी। साथ ही बालासाहेब की शिवसेना भी हमारे साथ है। इसलिए मुझे एकनाथ शिंदे के साथ भी चर्चा करनी है।
उन्होंने आगे कहा है कि, राज ठाकरे ने यह पत्र अच्छी भावना से लिखा है। मुझे पार्टी में चर्चा करनी है। उसके बाद ही सही फैसला लिया जा सकता है।
देवेंद्र फडणवीस की इस प्रतिक्रिया के बाद लोगों को भाजपा के सही फैसले का इंतजार है। देखना है भाजपा युद्ध लड़े बगैर जीत चाहती है या मैदान में बने रहकर सियासी जोर आजमाइश करना पसंद करती है?

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