Sri Lanka: लंका कांड में आगे क्या

दुनिया

अजय भट्टाचार्य
ब्रिटेन
से 1948 को आजाद होने के बाद श्रीलंका अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने संसदीय स्पीकर महिंदा यापा अबेवर्धना को बताया कि वो 13 जुलाई को इस्तीफा देने की योजना बना रहे हैं। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे भी इस्तीफा देने को तैयार हैं। खबर है कि राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद स्पीकर कार्यकारी राष्ट्रपति बनेंगे। नया राष्ट्रपति चुनने के लिए बाद में सांसदों के बीच एक चुनाव होगा। इधर राजपक्षे की कैबिनेट से पिछले दो दिनों में हरीन फर्नान्डो, मानुषा, नानायक्करा, बांदुला गुनवर्धना के बाद निवेश संवर्द्धन मंत्री धम्मिका परेरा ने भी रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
श्रीलंका के मौजूदा राजनीतिक संकट और राष्ट्रपति के इस्तीफा देने की स्थिति में श्रीलंका का संविधान में व्यवस्था है कि यदि राष्ट्रपति का पद उनके कार्यकाल की समाप्ति से पहले खाली हो जाता है तो संसद अपने सदस्यों में से किसी एक का राष्ट्रपति के लिए चुनाव शेष अवधि के लिए करेगी।
यह प्रक्रिया राष्ट्रपति के इस्तीफे के एक महीने के भीतर शुरू की जानी चाहिए। जिसमें राष्ट्रपति के इस्तीफे के तीन दिनों के भीतर संसद की बैठक होनी चाहिए। बैठक में संसद महासचिवराष्ट्रपति के इस्तीफे के बारे में संसद को सूचित करता है। यदि पद के लिए एक से अधिक व्यक्तियों को नामांकित किया जाता है तो गुप्त मतदान कराया जाना चाहिए और उस व्यक्ति को पूर्ण बहुमत से चुना जाना चाहिए.
श्रीलंका में राष्ट्रपति बनने के क्रम में परंपरा के अनुसार, इस अवधि के लिए अगली पंक्ति में प्रधानमंत्री होंगे। इस प्रकार श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे एक महीने से भी कम समय के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति बन सकते हैं, जब तक कि संसद एक नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं कर लेती। इस समय तक यदि जरूरी हो तो प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्य करने के लिए मंत्रिमंडल के मंत्रियों में से एक को नियुक्त कर सकता है।
आर्मी चीफ शवेंद्र सिल्वा ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि “एक ऐसा अवसर सामने आया है, जब हमें इस संकट का हल शांतिपूर्वक हल करना है।” उन्होंने श्रीलंका के नागरिकों से अपील की कि देश में शांति बनाए रखने के लिए वे सेना और पुलिस का सहयोग करें।
इधर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष मामले पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। संस्था को आशा है कि देश में राजनीतिक संकट जल्द खत्म हो जाएगा और आईएमएफ समर्थित आर्थिक कार्यक्रम के लिए बातचीत फिर से शुरू हो सकेगी। विदेशी मुद्रा संकट से निपटने के लिए श्रीलंका को कम से कम चार अरब डॉलर की जरूरत है। श्रीलंका में शीर्ष वकीलों के संघ, मानवाधिकार समूहों और राजनीतिक दलों के लगातार बढ़ते दबाव के बाद पुलिस ने शनिवार को सरकार विरोधी प्रदर्शनों से पहले कर्फ्यू हटा लिया था। यह कर्फ्यू सरकार विरोधी प्रदर्शनों को रोकने के लिए कोलंबो सहित देश के पश्चिमी प्रांत में सात संभागों में लगाया गया था। जिसमें नेगोंबो, केलानिया, नुगेगोडा, माउंट लाविनिया, उत्तरी कोलंबो, दक्षिण कोलंबो और कोलंबो सेंट्रल शामिल हैं। यह कर्फ्यू शुक्रवार रात नौ बजे से अगली सूचना तक लागू किया गया था। श्रीलंका के बार एसोसिएशन ने पुलिस कर्फ्यू का विरोध करते हुए इसे अवैध और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया। बार एसोसिएशन ने एक बयान में कहा, ‘‘इस तरह का कर्फ्यू स्पष्ट रूप से अवैध है और हमारे देश के लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है जो अपने मूल अधिकारों की रक्षा करने में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और उनकी सरकार की विफलता को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।” श्रीलंका के मानवाधिकार आयोग ने भी पुलिस कर्फ्यू को मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताया था। विवादों में घिरे श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे शनिवार को राजधानी में स्थिति अपने आधिकारिक आवास से भाग चुके हैं। इससे पहले कि टेलीविजन फुटेज में देखा गया कि प्रदर्शनकारियों ने नेता के इस्तीफे की मांग करते हुए उनके आवास पर धावा बोल दिया था। ऐसे में खुद को खतरे में देख वो मौके पर से भाग निकले। प्रदर्शनकारियों ने आवास में जमकर बवाल काटा था जो अब भी जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.