जब बालासाहेब ने शिवसेना छोड़ने का ऐलान किया था!

मुंबई राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
इतिहास
खुद को दोहराता है। बुधवार की देर शाम मुख्यमंत्री के सरकारी निवास वर्षा ने निकलते उद्धव ठाकरे बिना कुछ कहे बहुत कुछ संदेश देने में सफल रहे। जो धड़ा खुद को असली शिवसेना साबित करने की कोशिश में जुटा है उसे भी समझ में आ गया होगा कि जब तक जमीन पर काम करने वाला शिवसैनिक बालासाहेब ठाकरे व उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी के साथ है, शिवसेना का बल बांका नहीं होने वाला। चैनल हर क्षण जिस तरह से महाराष्ट्र सरकार गिरा रहे हैं क्या सचमुच महाराष्ट्र में सत्ता का पाला पलट जाएगा या फिर घर खाली करना भी एक सियासी चाल का हिस्सा है। असम के गुवाहाटी में 40 से ज्यादा विधायकों के साथ बैठे बागी नेता एकनाथ शिंदे आखिर असम जाकर क्यों बैठ गये? इसके भी कारण जान लीजिये। शिंदे और उन्हें उँगलियों पर नचाने वाले अदृश्य हाथों (जो सभी जानते हैं कि वे किसके हैं) को डर था कि सूरत उनके लिए सुरक्षितनहीं था/है। गुजरात प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल का गढ़ होने के बावजूद असुरक्षित सूरत छोड़ने में सूरत नगर निगम की स्थायी समिति चेयरमैन परेश पटेल ने इन बागी विधायकों को सूरत से गुवाहाटी पार्सल करने का प्रबंध किया।
परसों शाम बालासाहेब की विरासत संभाल रहे उद्धव के फेसबुक लाइव पर इमोशनल कार्ड खेला। बोले कि बात करो इस्तीफा देने को तैयार हूं। कुछ ऐसा ही वाकया 30 साल पहले यानी जुलाई 1992 में हुआ था। उस वक्त शिवसेनाप्रमुख बाला साहेब ठाकरे ने भी इस्तीफे की पेशकश कर हर किसी को हैरान कर दिया था। एक अंग्रेजी अख़बार के मुताबिक सीनियर ठाकरे ने पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखा था, ‘अगर एक भी शिवसैनिक मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ खड़ा होकर कहता है कि मैंने आपकी वजह से शिवसेना छोड़ी या आपने हमें चोट पहुंचाई, तो मैं एक पल के लिए भी शिवसेना प्रमुख के रूप में बने रहने के लिए तैयार नहीं हूं।‘ काडर और सरकार पर अपनी पकड़ साबित करने के लिए बालासाहेब ठाकरे ने ऐलान किया था कि मैं शिवसेना छोड़ रहा हूं। क्योंकि छह महीने पहले ही नागपुर अधिवेशन के समय उनके सबसे खास शिष्य छगन भुजबल 11 विधायकों के साथ शिवसेना को जय महाराष्ट्र कर गये थे। तब शिवसेना के नेतृत्व पर उठते सवालों के जवाब में बालासाहेब का सामना में बयान छपा था। यह बयान छपने के बाद वे और मजबूत होकर उभरे। विधायक, पार्षद सब उनके पीछे और सबकी जुबान पर एक ही नारा कि हमें सरकार नहीं साहिब चाहिए। जबकि तब शिवसेना की सरकार बनी भी नही थी। शिवसेना ने विपक्ष का नेता मनोहर जोशी को बनाया था जिससे भुजबल नाराज चल रहे थे। महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच मौजूदा शिवसेना पक्षप्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने पिता बाल ठाकरे के 30 साल पहले वाले अंदाज में दिखे। फेसबुक पर लाइव संबोधन में कहा कि अगर कोई विधायक सामने से आकर कहेगा तो वे मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे देंगे। फिर सरकारी बंगला वर्षा से सामान उठाया और सीधे मातोश्री शिफ्ट हो गए। इस कदम से शिवसैनिकों में उबाल आ गया। वर्षा से लेकर मातोश्री तक शिवसैनिकों का सैलाब उमड़ पड़ा। नारे लगने लगे उद्धव तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं। कौन आया कौन आया शिवसैनिक उद्धव आया। यह संदेश देने की कोशिश की गई कि उद्धव के साथ कार्यकर्ता खड़े हैं उनके नाम इस पूरे शो में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे भी थे। उन्होंने भीड़ को विक्ट्री साइन भी दिखाया यह विश्वास दिलाने के लिए कि पार्टी मजबूत है और विजय उनकी ही होगी। अब रहा सवाल एकनाथ शिंदे और उनके उन साथियों का जिनके भीतर अचानक उग्र हिंदुत्व की भावना का उदय हुआ उसके पीछे कारण एक अख़बार की वायरल में निहित है कि इस कथित बगावत से दस-बारह दिन पहले एकनाथ शिंदे के आर्थिक कामकाज संभालने वाले उनके सचिव सचिन जोशी को ईडी की नोटिस मिली थी। नोटिस मिलने के बाद से सचिन भी गायब हैं। मराठी अख़बार की यह क्लिपिंग कितनी वास्तविक है यह अलग बात है मगर यह भी सच है शिंदे के साथ जो विधायक हैं वे ईडी के रडार पर थे/हैं।

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