जब मक्के वालों ने पैगंबर ए इस्लाम पर जुल्म के पहाड़ तोड़े

इस्लाम के पन्ने से

और इस तरह आप भटके हुए लोगों को सही राह दिखाने लगे । आप पर ईमान लाने वालों में हज़रत खदीजा पहली औरत थीं । इसके बाद ईमान लाने वालों में आपके चचेरे भाई हज़रत अली रज़ी० , हज़रत जुबैर रजी० , हज़रत अबूबक्र रजी ० , हज़रत उस्मान रज़ी ० , हज़रत अब्दुर्रहमान इबने औफ रज़ी ० , हज़रत सअद इब्न अबी वकास रज़ी ० और हज़रत तलहा रज़ी ० थे ।

इस तरह ईमान लाने वालों की तादाद मुसलसल बढ़ती गयी । नबूअत के बाद आप तीन साल तक ख़ास ख़ास लोगों को समझाते रहे । अब तक चालीस लोग ईमान ला चुके थे । चालीसवें हज़रत उमर थे जो ईमान लाये थे ।

एक दिन आप सफा पहाड़ी पर चढ़ गये और ज़ोर से आवाज़ लगाई ” या सबाहा “। नारा सुनने के बाद अहले कुरैश का सारा कबीला वहाँ जमा हो गया । हज़रत मोहम्मद स० ने पूछा कि ऐ बनू मुत्तलिब , ऐ बनूफिहर , ऐ बनू काब अगर मै तुमको यह खबर दूं कि पहाड़ी की दूसरी ओर एक फौज खड़ी हुई है । जो तुम पर हमला करना चाहती है तो क्या तुम इस पर यकीन कर लोगे । लोगों ने कहा आपने अब तक कोई बात झूठ नहीं कही है हम आपको सच्चा और ईमानदार मानते हैं इसलिए बिल्कुल यकीन कर लेंगे । आपने कहा मेरे भाईयो ! खुदा की नाराजगी से बचो उसके अज़ाब से बचो । अल्लाह को एक मानो और मुझे रसूल मान लो मैं तुम्हें एक अल्लाह की इबादत की तरफ बुलाता हूँ । इस समय काबे के अन्दर तीन सौ साठ बुत रखे हुये है और हर कबीला अपने- अपने बुत को खुदा मानता है । तीन सौ साठ खुदा नहीं हो सकते । खुदा एक है उसकी कोई साझीदार नहीं मोहम्मद स० उसके रसूल है ।

हज़रत मोहम्मद स० की आवाज़ सुनकर अरब की सारी ज़मीन हिल उठी । अबूलहब का चेहरा गुस्से से लाल हो गया और बोला तूने हमे यहाँ इसीलिये बुलाया था।

फिर एक दिन हज़रत मोहम्मद स० ने काबा के सहन से तौहीद की आवाज़ लगायी और कहा कि तुम सब तो दादा इब्राहीम के दीन से बिल्कुल हट गये हो । बुतपरस्ती करके खुदा का साझी बनाते हो । यह सुनना था कि कुरैश हज़रत मोहम्मद स० को मार डालने की नीयत से दौड़े और कहा कि काबा की तौहीन हुई है । हारिस इब्ने अबी हाला अपने नबी को बचाने के लिये घर से दौड़कर काबे में आ गये । हारिस पर चारों ओर से हमले होने लगे और वे शहीद हो गये । अल्लाह की राह में पहली शहादत हज़रत हारिस की हुयी । खुद शहीद हो गये अपने प्यारे रसूल स० पर जान न्यौछावर कर दिया।

अल्लाह के रसूल ने खुदा का पैग़ाम एक एक आदमी तक पहुँचाने का काम जारी रखा । खुदा एक है सिर्फ उसी की इबादत करनी चाहिये । जिन्न , पेड़ , पत्थर और बुतों की पूजा करने से मना करते , बेटियों को ज़िन्दा दफ्न करने से रोकते , जिनाकारी , जुआ और शराब से दूर रहने की हिदायत फरमाते , जुबान पर गंदी बात लाने से रोकते , जिस्म व लिबास पाक रखने की नसीहत देते । यह सारी दुनिया खुदा की बनाई हुयी है । इंसान सूरज , चाँद और सितारे सब उसी ने बनाये हैं । फरिश्ते और नबी भी उसी के हुक्म के ताबे हैं । मरने के बाद हर आदमी को खुदा के सामने अपनी ज़िन्दगी का हिसाब पेश करना पड़ेगा और अपने किये के मुताबिक उसे सज़ा और जज़ा मिलेगी ।

इस्लाम , अल्लाह , पैगम्बर और कुरान शरीफ सबकी अहले कुरैश ने हँसी उड़ायी। ( माज़ अल्लाह) और लोगों से कहा कि मोहम्मद स ० दीवाने हैं । इन पर बुतों की मार पड़ेगी । मिर्गी आती है दौरे पड़ते हैं । इन्हें झूठे फरिश्ते नज़र आते हैं । यह काहिन हैं । कुरान झूठा है ( माज़ अल्लाह) जिसे इसने गढ़ा है । यमामा में एक आदमी है जिसका नाम रहमान है वही इनको सब सिखाता है । अगर ये चाँद के दो टुकड़े कर दें तो हम ईमान ले आयेंगे और इनके खुदा , कुरान और इस्लाम को कुबूल कर लेंगे । इन्हें हम अपना रसूल भी मान लेंगे ।

हज़रत मोहम्मद स० ने अपनी उंगलियों से इशारा किया और चाँद दो टुकड़ो में तकसीम हो गया । यह मोजिजा देखकर सभी हैरत में पड़ गए और बिना कुछ कहे अपने – अपने घरों की ओर चल दिये ।

इसके बाद कुरैश ने मिलकर हज़रत मोहम्मद स० पर जुल्म ढाना शुरू कर दिया। चादर डालकर घसीटा गया तो हज़रत अबूबक्र रजि० ने आकर छुड़ाया। सजदे में आप पर ओझड़ी डाली गई तो हज़रत फातिमा , आपकी चहेती साहिबजादी ने उसे हटाया।

आप पर राह चलते वक्त ऊपर से कूड़ा करकट और गंदगी फेंकी जाती । रास्ते में काँटे बिछाये जाते । उतबा बिन अबीमुईन ने तो एकबार आप पर थूकों की बरसात की। उबई बिन ख़लफ ने एक सड़ी हुई हड्डी तोड़कर उसकी ख़ाक आप पर उड़ाई । राह चलते तो अबूलहब पीछे से पत्थर मार मारकर आपकी एड़ियों को लहूलुहान कर देता। अबूलहब की बीवी उम्मे जमील रात में आपके रास्ते पर और दरवाज़े पर काँटे डाल देती थी ।हज़रत मोहम्मद स० की दो बेटियाँ रूकैया और कुलसुम को जो अबूलहब के बेटों उतबा और उतैबा को ब्याही थीं अबूलहब ने तलाक दिलवा दिया ।

एक दिन हज़रत मोहम्मद स० काबे में नमाज़ पढ़ रहे थे कि मक्के के सरदारों ने आपको घेर लिया और एक साथ हमलावर हुए । उतबा बिन अबी मुईन ने आपके गले में चादर डाल दी और घसीटना शुरू किया । आप लहूलुहान हो गये और गले में इस तरह कस गया कि आपका दम घुटने लगा। तभी अबूबक्र ने आकर उन्हें रोका और कहा कि इनका तुम सब इसलिये कत्ल कर देना चाहते हो क्योंकि यह कहते है कि मेरा रब अल्लाह है । हज़रत मोहम्मद स० की जान तो बच गई मगर अबूबक को बहुत मारा गया। लोग उनकी दाढ़ी पकड़कर काबे से घसीटते हुये बाहर ले आये । उनका सर फट गया ।

दीन तेजी से फैल रहा था। काफिर बौखलाये हुये थे।काफिरों ने मिलकर एक बार उतबा को हज़रत मोहम्मद स० के पास भेजा । उसने आपके पास पहुँचकर मीठे लहजे में कहा कि अगर आप अपना दीन सोने चाँदी के लिये फैलाना चाहते हैं तो हम सब मिलकर आपको इतना धन दे देंगे कि बड़े से बड़ा दौलतमंद आदमी भी आपकी बराबरी न कर सकेगा और अगर सरदार बनने की तमन्ना है तो हम सभी आपको सरदार भी मानने के लिये तैयार हैं अगर आपको कम उम्र की चांद जैसी बीबी चाहिये तो जिसे आप कह देंगे हम सभी उससे आपकी शादी करा देंगे मगर आप अपनी तब्लीग बन्द कर दें और लोगों से ये न कहें कि अल्लाह एक है और उसका कोई साझी नहीं है । यह सब चुपचाप आप सुनते रहे फिर मीठे अंदाज़ में जवाब दिया “लाइलाहाइल्लल्लाह “। उतबा वहाँ से उठकर चला गया । वह शर्मिन्दा था उसकी यह तरक़ीब कामयाब नहीं हुई ।

प्रस्तुतकर्ता- रईस खान
क़ौमी फ़रमान, मुंबई

किताब- आमना के लाल
लेखक- गणेश तिवारी ‘नेश’

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