कांग्रेस की हल्ला बोल रैली में जाने से क्यों तरसे मुंबई कार्यकर्ता? कौन गांधी परिवार के नेतृत्व को कर रहा कमजोर?

मुंबई राजनीति

विजय यादव, News stand18
मुंबई।
दिल्ली के रामलीला मैदान (Ramlila maidan) में 4 सितंबर को राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नेतृत्व में होने वाली हल्ला बोल रैली (Hlla Bol Raili) को फ्लॉप करने का खेल मुंबई (Mumbai) में शुरू हो गया है। उक्त रैली में शामिल होने के लिए मुंबई से बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता और पदाधिकारी लालायित थे, लेकिन इनके उत्साह और जोश पर मुंबई कांग्रेस (Congress) ने पानी फेर दिया है।
पार्टी सूत्रों के अनुशार मुंबई के सभी 6 जिले से बड़ी संख्या में मुंबई कांग्रेस कमेटी को दिल्ली जाने वाले कार्यकर्ताओं की लिस्ट दी गई थी, जिनके टिकट की व्यवस्था मुंबई कांग्रेस को करनी थी। इसी कड़ी में उत्तर पश्चिम जिला से मुंबई कांग्रेस को 58 लोगों की सूची सौंपी गई थी, जबकि इसमें से सिर्फ 7 लोगों की ही व्यवस्था भाई जगताप की अध्यक्षता वाली मुंबई कांग्रेस कर सकी। अगर इसी तरह सभी 6 जिले से 7-7 लोगों की व्यवस्था की गई होगी तो, जाहिर है कि सिर्फ 42 लोग मुंबई कांग्रेस की ओर से हल्ला बोल रैली में शामिल होंगे। लाखों कार्यकर्ताओं वाले मुंबई शहर से इतनी कम संख्या में दिल्ली जाने के दो मतलब हैं। पहला यह की मुंबई कांग्रेस की अर्थ व्यवस्था बिल्कुल खराब है या राहुल गांधी के नेतृत्व को कमजोर साबित करने की साजिश है।
मुंबई कांग्रेस की इस बेरुखी के बाद उत्तर पश्चिम जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी मजबूरी जताते हुए एक संदेश जारी किया है। जिले के तमाम पदाधिकारियों को भेजे गए इस संदेश में जिला अध्यक्ष क्लाइव डायस ने कहा है, “साथीयों हमनें मँहगाई के खिलाफ दि 4 सेप्टें की दिल्ली में होनें जा रही रैली में जानें वाले कुल 58 कार्यकर्ताओं की सूची मुम्बई कांग्रेस को समय पर भेज दी थी , जिसमें से सिर्फ 7 कार्यकर्ताओं का दिल्ली जाने का टिकट ही मुम्बई कांग्रेस की तरफ से कन्फर्म हो पाया है , बाकी लोगों के टिकट की व्यवस्था अब नही हो पाएगी , ऐसी सूचना मुम्बई कांग्रेस नें दी है , मैं आप सभी से माफी चाहता हूं।
अतः जिन कार्यकर्ताओ को दिल्ली जाने हैं उन्होनें अपनें माध्यम से व्यवस्था करनी है । हमें खेद है कि मुम्बई कांग्रेस की तरफ से सभी 58 लोगों की व्यवस्था नही हो सकी है। कृपया सभी कार्यकर्ता इस सूचना को संज्ञान लेकर अपनी व्यवस्था अगर खुद कर सकते हैं तो कर लें।
क्लाईव्ह डायस
( जिला अध्यक्ष )
इस संदेश को पढ़ने के बाद साफ जाहिर होता है कि, तमाम कार्यकर्ताओं के दिल्ली नहीं जाने का मलाल जिला अध्यक्ष को है। वह अपनी इस पीड़ा को छुपा नहीं सके और सभी पदाधिकारियों को मुंबई कांग्रेस के इस फैसले से अवगत करा दिया।
ज्ञात हो कि गुलाम नबी आजाद (gulam Nabi Azad) के कांग्रेस छोड़ने के बाद कांग्रेस में बड़ी उथल पुथल मची हुई है। गुलाम नबी आजाद की नाराजगी के बाद मुंबई (Maharashtra) से पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, मिलिंद देवड़ा व मुकुल वासनिक की भी नाराजगी भरी खबरें मीडिया में आई थी। कांग्रेस की 4 सितंबर हल्ला बोल रैली वाले ही दिन गुलाम नबी आजाद जम्मू के सैनिक फार्म में रैली करने की घोषणा कर दी है। अब सवाल यह उठता है कि, क्या गांधी परिवार के नेतृत्व को कमजोर साबित करने के लिए मुंबई से कार्यकर्ताओं की संख्या कम की जा रही है? इसका सही जवाब कांग्रेस के जिम्मेदार पदाधिकारी ही दे सकते हैं।

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