मुलायम सिंह यादव की नहीं होगी तेरहवीं, जाने ऐसा क्यों?

उत्तर प्रदेश समाचार

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की तेरहवीं नही करने का निर्णय उनके परिवार ने लिया है। जिस व्यक्ति ने अपने जीवन काल में अकूत संपत्ति परिवार को दिया आखिर उसकी तेरहवीं क्यों नहीं की जा रही है? ज्ञात हो कि मुलायम सिंह यादव का गत मंगलवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया।
दरअसल मुलायम सिंह के गांव सैफई में मृत्यु भोज परंपरा बंद कर दी गई है। जबकि आमतौर पर किसी के निधन के बाद तेरहवीं और सतरहवीं होती है। इस दिन ब्राह्मण भोज के साथ ही रिश्तेदारों, परिचितों, जान-पहचान वालों और गांव वालों को भोज कराने का चलन है।
लेकिन यह चलन सैफई गांव के लोगों ने बहुत पहले बंद कर दिया था। सैफई के ग्रामीणों का मानना है कि तेरहवीं का भोज करने से आर्थिक बोझ पड़ता है। एक तरफ लोग अपनों से बिछड़ने के गम में डूबे होते हैं दूसरी ओर भोज का आयोजन ठीक नहीं लगता है। इसी को देखते हुए सैफई गांव ने तेरहवीं नहीं करने का फैसला बहुत पहले किया था।
हालांकि मुलायम परिवार के सामने किसी तरह की आर्थिक समस्या नहीं है। वह तेरहवीं कर सकता है लेकिन सैफई के लोगों का यह भी मानना है कि अगर कोई बड़ा आदमी तेरहवीं करता है तो उसे देखकर गरीब आदमी भी करेगा और उस पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसी वजह से अमीर घरों के लोग भी सैफई की परंपरा निभाते हैं और तरहवीं नहीं करते है। अब अखिलेश यादव ने भी सैफई की परंपरा निभाते हुए पिता मुलायम की तेरहवीं नहीं करने का फैसला लिया है।
मुलायम सिंह यादव के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिये 21 अक्टूबर को पूरे यूपी में कार्यक्रम करेगी। इसे लेकर गुरुवार को प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने पार्टी के सभी सांसदों, विधायकों, जिला-नगर अध्यक्षों समेत सभी नेताओं-कार्यकर्ताओं को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, अंत्येष्टि के 11वें दिन शांति यज्ञ के बाद अस्थियों को विसर्जन के लिये हरिद्वार और प्रयाग ले जाया जाएगा।

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