नीतीश को गुस्सा क्यों आया !

राजनीति लेख

अजय भट्टाचार्य
बिहार
विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विधानसभाध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के बीच हुए वाकयुद्ध के लंबे राजनीतिक फलितार्थ हैं। गठबंधन में कम विधायक होने के बावजूद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के बाद जिस तरह भाजपा का स्थानीय नेतृत्व सरकार पर हमले करता रहा है, यह संवाद उसी का नतीजा भी कहा जा सकता है। अब इस प्रहसन के उसका असल कारण और इसके राजनीतिक परिणाम को लेकर क़यास लगा रहे हैं। नीतीश कुमार ने विधान सभाअध्यक्ष के खिलाफ जिस तरह की शब्दावली प्रयोग की और जैसे तेवर दिखाए, इससे पहले तक किसी मुख्यमंत्री ने विधानसभा में आसन के प्रति ऐसे तेवर नहीं दिखाए हैं।
मामला सरस्वती पूजा के दौरान लखीसराय जिले में वहां की स्थानीय पुलिस और विजय सिन्हा के बीच हुए विवाद से जुड़ा है, जो काफी दिनों से चला आ रहा था। सोमवार को जब फिर एकबार इस मामले ने तूल पकड़ा तो नीतीश विधानसभाध्यक्ष पर जमकर बरसे और कहा कि आप संविधान के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को लेकर विजय सिन्हा को घेरा और कहा कि हम बैठकर पूरे मामले को सुन रहे थे, जब मंत्री बता रहे हैं कि मामले की पूरी जाँच हो रही है तो ये सदन का विषय नहीं है, मामला कोर्ट का है। सदन में आपको जानकारी दी जा सकती है लेकिन आप हस्तक्षेप नहीं कर सकते। उन्होंने स्पीकर को संविधान देखने की नसीहत दे डाली। बोले- हम ना ही किसी को फंसाते हैं और ना ही बचाते हैं। बार-बार इस तरह के सवाल सदन में करना गलत है और ऐसे सदन नहीं चलता है। जांच के बाद अगर रिपोर्ट संतुष्ट होने लायक नहीं होगी तो कोर्ट उस मामले को संज्ञान में लेगा, ये आपको अधिकार नहीं है। आप संविधान निकालें, मुझे बहुत तकलीफ हुई है। हमें ये किसी तरह से मंजूर नहीं है। दूसरी तरफ स्पीकर बार-बार कहते रहे कि आपके मंत्री कुर्की जब्ती पर जवाब नहीं दे पाये। जबकि नीतीश कुमार ने कहा कि रिपोर्ट कोर्ट में जाएगी और आप बार-बार उसके बदले हस्तक्षेप करेंगे तो ये गलत है. सदन इस तरह नहीं चलेगा। जिसपर स्पीकर ने भी जवाब देते हुए कहा कि आप ही बता दें सदन कैसे चलेगा। हमें आप सबने ही यहां बैठाया है।
स्पीकर ने सीएम की नाराजगी के बाद कहा कि ये मामला मेरे क्षेत्र से जुड़ा है। आप हमसे अधिक संविधान जानते हैं लेकिन आसन को बार-बार हतोत्साहित और प्रभावित करने की कोशिश ना हो। पारदर्शिता बने और मैं आपकी ही भावना को स्थापित कर रहा हूं। मुझे आप सबने मिलकर बैठाया है। प्रशासनिक अराजकता मुख्यमंत्री कतई नहीं होने देंगे। भाजपा की तरफ से लखीसराय के मामले को जिस तरह से विधानसभा में हर दो से तीन दिन बाद सवाल उठा कर सरकार को घेरने का प्रयास हो रहा है, उससे नीतीश खासे नाराज़ थे। लखीसराय विधानसभाध्यक्ष विजय सिन्हा का निर्वाचन क्षेत्र है। वहाँ सरस्वती पूजा के दौरान कोविड नियमों के उल्लंघन के आरोप में भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी से ना केवल सिन्हा बल्कि बिहार भाजपा का नेतृत्व भी नाराज़ था। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष की सही कार्रवाई की अपील को पहले स्थानीय स्तर पर और फिर डीजीपी के स्तर पर ठण्डे बस्ते में डालने का प्रयास हुआ, इससे वो नाराज थे। नीतीश कुमार के तेवर से साफ़ है कि उन्हें एक सीमा से अधिक सरकार के कामकाज में विधान सभा अध्यक्ष हो या बिहार भाजपा का कोई वरिष्ठ नेता या मंत्री हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं है। भले ही उनकी पार्टी संख्या के आधार पर विधान सभा में नम्बर तीन क्यों न हो लेकिन वो सरकार अपनी मर्ज़ी यानी अपने विवेक के आधार पर ही चलायेंगे। नीतीश की बातों से ये भी साफ़ झलका कि विधान सभा में जो कुछ हो रहा है, वह संविधान सम्मत नहीं है।

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