दिग्विजय सिंह के विवादित बयान, क्यों आहत हैं राहुल गांधी?

लेख समाचार

विजय यादव
क्या
उन्हे बोलने से पहले इस बात का अहसास नही होता कि, मैं जो बोल रहा हूं उससे विवाद होगा, पार्टी की क्षति होगी। अगर इस बात का उन्हे अहसास है कि, उनकी जुबान से निकले शब्द आग में पेट्रोल का काम करेगी तो आखिर किसे खुश करने के लिए वे ऐसा बोलते हैं।
अगर यह मान लिया जाय की उन्हे कुछ कहने और बोलने से पहले इस बात का अहसास नही होता तो इसका मतलब है कि उम्र के आखिरी पड़ाव में भी उनमें मैच्योरिटी नही है। अगर इस पड़ाव पर भी इनमे गंभीरता नही है तो, सवाल उठता है कि अब तक इन्होंने देश के एक बड़े राज्य में लंबे समय तक मुख्यमंत्री कैसे बने रहे। सवाल अनगिनत हैं। यह सवाल मेरे नही है, बल्कि हर उस कांग्रेसी का है जिसका रोजाना आम मतदाओं से सामना होता है। वह भी ऐसे समय पर जब देश का एक वर्ग किताबों की जगह व्हाट्सएप और फेसबुक यूनिवर्सिटी से ज्ञान अर्जित कर रहा हो।
आप अंदाजा लगाइए ऐसे अंध भक्तों का एक साधारण कार्यकर्ता कैसे जवाब देता होगा, कितना माथा खपाता होगा मूर्खों को सही और गलत का अंतर बताने में।
ऐसा नहीं है कि, इन्हे इन सभी बातों का अहसास नही है। इनकी बार बार इन गलतियों को देखकर यही कहा जा सकता है कि, इन्हे हर बात का पता है, फिर भी आदतें नही जा रही हैं।
अब आप समझ गए होंगे कि हम बात किसकी कर रहे हैं। आपने सही समझा मैं बात कर रहा हूं कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह की।
इनकी जुबान ने ताजा विवाद भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सर्जिकल स्ट्राइक पर खड़ा किए हैं। दिग्विजय सिंह अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह ने सोमवार को सर्जिकल स्ट्राइक पर विवादित बयान दे डाला। दिग्विजय ने जम्मू में रैली के दौरान सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांग लिए। हालांकि, अब उन्होंने अपने बयान से किनारा किया है। उन्होंने कहा कि वह भारतीय जवानों का सम्मान करते हैं।
इनके इस बचकाने बयान पर राहुल गांधी को मीडिया के सामने आकर कहना पड़ा कि, दिग्विजय सिंह जी ने जो कहा है उससे मैं बिल्कुल सहमत नहीं हूं, हमारी आर्मी पर हमें पूरा भरोसा है अगर आर्मी कुछ करे तो उन्हें सबूत देने की जरूरत नहीं है। उनका बयान निजी है वो हमारा नहीं है।

आइए अब बात करते हैं इनके कुछ उन बयानों पर जो कभी कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया तो कभी पार्टी के लिए ऐसी गलफास बन गई जिससे बाहर निकलने के लिए कांग्रेस को लंबा संघर्ष करना पड़ा।

दिग्विजय सिंह अपने बयानों की वजह से अक्सर चर्चा में रहते हैं। बीते साल यानी 2021 में उन्होंने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि जिन महिलाओं की उम्र 40 साल से ज्यादा है, वही पीएम मोदी से प्रभावित हैं, न कि जींस पहनने वाली लड़कियां। इसी कार्यक्रम में दिग्विजय सिंह ने दावा किया था कि साल 2024 में अगर पीएम मोदी चुनाव जीतते हैं तो वह भारतीय संविधान बदलकर आरक्षण भी खत्म कर देंगे। उस दौरान दिग्विजय ने गाय को लेकर भी विवादित बयान दिया था।

साल 2008 का एक बयान भी खूब विवादों में रहा। उन्होंने दिल्ली के बाटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी करार दिया था। साल 2013 के दौरान दिल्ली की अदालत ने इस एनकाउंटर के दौरान पकड़े गए आतंकी को सजा सुनाई, तब भी दिग्विजय सिंह अपने बयान पर कायम दिखे। उन्होंने कहा कि एनकाउंटर फर्जी था। अगर न्यायिक जांच होती तो काफी बातें सामने आ जातीं। उनके इन बयानों पर कांग्रेस को आज तक सफाई देनी पड़ती है।

यूपीए सरकार के दौरान भी दिग्विजय सिंह ने कई विवादित बयान दिए। टीवी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में दिग्विजय सिंह ने कहा था कि सत्ता के दो केंद्र (तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी) ठीक से काम नहीं कर सके। इस सिस्टम को भविष्य में बदलना होगा। इस बयान पर भाजपा के नेता आज भी दिग्विजय सिंह और कांग्रेस पार्टी को घेरने की कोशिश करते हैं।

दिग्विजय सिंह ने दावा था कि मुंबई आतंकी हमले से कुछ घंटे पहले पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे ने अपनी जान को खतरा बताया था। दिग्विजय सिंह ने इस बातचीत की रिकॉर्डिंग उनके पास होने का दावा भी किया था। उनके इस बयान पर काफी विवाद हुआ, लेकिन दिग्विजय सिंह आज तक बातचीत का ब्यौरा साझा नहीं कर पाए हैं।

अमेरिका ने जब अलकायदा के आतंकी ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था, तब दिग्विजय सिंह ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, ‘ओसामा जी कई साल से पाकिस्तान में रह रहे थे। ऐसा कैसे संभव है कि पाकिस्तान के अधिकारियों को पता नहीं चला। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को ओसामा बिन लादेन को सम्मानपूर्वक दफन करना चाहिए था। बाद में दिग्विजय सिंह ने मीडिया पर आरोप लगाया कि इन बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। इनके अलावा भी दिग्विजय सिंह तमाम ऐसे बयान दे चुके हैं, जिससे कांग्रेस के लिए असहज स्थिति बन गई।

अगर इनकी जुबान इसी तरह आगे भी चलती रही तो इसमें कोई शक नही की पार्टी को और अधिक संघर्ष करना होगा। राहुल गांधी पार्टी को मजबूत और समर्थ बनाने के लिए चाहे जितनी भी पदयात्रा कर लें, दिग्विजय जैसे नेता खौलते दूध में नींबू के रस की तरह काम करते रहेंगे।

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