कब्रिस्तान की राजनीति: याकूब मेमन क्या बीएमसी चुनावों में वोटों का ध्रुवीकरण करेगा?

मुंबई

विजय यादव
मुंबई।
फांसी दिए जाने के सात साल बाद महाराष्ट्र में याकूब मेमन (Yakub Memon) की कब्र को लेकर राजनीति जारी है। कब्र के चारों ओर “सजावट” की खोज से शुरू हुई राजनीति समझा जा रहा है कि इसे मनपा चुनाव में भुनाने की तैयारी है।
भाजपा और उद्धव ठाकरे (uddhav Thakare) के नेतृत्व वाली शिवसेना (Shivsena) दोनों ने 1993 के मुंबई विस्फोटों के दोषी के ‘रिश्तेदार’ के साथ एक-दूसरे नेताओं की तस्वीरें और वीडियो भी जारी कर दिए हैं।
भाजपा विधायक अतुल भाटखलकर (Atul Bhatkhalkar) की ओर से जारी एक वीडियो में मेमन के “रिश्तेदार” रऊफ मेमन को शिवसेना नेता और मुंबई (Mumbai) की पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर (Kishori pednekar) के साथ बैठक में भाग लेते हुए दिखाया गया है।
उद्धव के सहयोगी हर्षल प्रधान ने भाजपा के देवेंद्र फडणवीस (Devendra fadanvis) और चंद्रकांत पाटिल (Chandrakant Patil) के साथ रऊफ मेमन को कथित तौर पर दिखाते हुए एक तस्वीर साझा करते हुए पलटवार किया।
इससे पहले, भाजपा ने दावा किया था कि जब उद्धव के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार महाराष्ट्र में सत्ता में थी, तब मेमन की कब्र को “सुशोभित” किया गया था। इसके बाद शिवसेना ने पलटवार करते हुए कहा कि उस समय भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार थी, जब मेमन का शव उसके रिश्तेदारों को सौंपा गया था।
आने वाले बीएमसी चुनावों से पहले दोनों पक्षों द्वारा इस मुद्दे को जीवित रखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janata party) खुद को “असली हिंदुत्व” के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित कर रही है। इसमें बीजेपी को एक अच्छा मौका दिख रहा है, क्योंकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का एक बड़ा हिस्सा अब उसकी सहयोगी है।
मेमन को दफनाए गए कब्रस्तान के जीर्णोद्धार की मीडिया रिपोर्ट को सबसे पहले बीजेपी ने ही पकड़ा था। वर्षों तक ठाकरे और शिवसेना द्वारा नियंत्रित बीएमसी के साथ इसने पूछा कि यह पार्टी की नाक के नीचे कैसे हो सकता है।
इस मुद्दे के जरिए उद्धव सेना और उसके सहयोगी राकांपा- कांग्रेस को भाजपा ने झटका देने का प्रयास किया है। पहली बात कब्रिस्तान एक ट्रस्ट द्वारा चलाया जाता है, न कि बीएमसी द्वारा। दूसरा जिस समय 2015 में वहां याकूब मेमन दफनाया गया तब देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा सरकार थी।
भाजपा इस अभियान से उद्धव ठाकरे की शिवसेना को “मुस्लिम समर्थक” के रूप में चित्रित कर ध्रुवीकरण का खेल कर रही है, जिसका सीधा लाभ मनपा चुनाव में लेने का प्रयास है। अब आगामी मनपा चुनाव के बाद ही यह पता चलेगा कि, वोटों के ध्रुवीकरण का लाभ किसे और कितना मिला।

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