ऐतिहासिक मजाक की साक्षी विधानसभा

राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
बिहार
विधानसभा भवन शताब्दी समारोह ने राज्य में सत्तारूढ़ राजग सरकार की भीतरी उथल-पुथल को उजागर कर दिया है। इस उथल-पुथल का नतीजा यह रहा कि एक ऐतिहासिक समारोह मजाक बनकर रह गया। समारोह के निमंत्रण पत्र पर बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री या विपक्ष के नेता की उपस्थिति का उल्लेख नहीं था। निमन्त्रण पत्र के दूसरे पन्ने पर समारोह, सुरक्षा प्रोटोकॉल और समारोह के बाद रात के खाने के निमंत्रण का उल्लेख किया गया था। जबकि राज शिष्टाचार के अनुसार समारोह में राज्यपाल फागू चौहान के साथ इन दोनों नेताओं को प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करना था और किया भी। निमंत्रण पत्र विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा की तरफ से भेजा गया था। इससे जदयू के साथ-साथ राजद भी नाराज थी/है। राज्य के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी के अनुसार “सबसे पहले, विधानसभा सचिव को निमंत्रण भेजना चाहिए था। राज्यपाल और मुख्यमंत्री के अलावा विपक्ष के नेता के बिना विधानसभा कैसे पूरी हो सकती है। कार्ड में कम से कम इन तीन गणमान्य व्यक्तियों का उल्लेख करना उचित होता। ध्यान रहे सिन्हा भाजपा कोटे से हैं।
दो पन्नों का निमंत्रण पत्र (हिंदी में) विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा द्वारा भारत के स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष ‘अमृत महोत्सव’ के अवसर पर लोगों को निमंत्रण और विधानसभा भवन शताब्दी वर्ष के समापन समारोह के साथ शुरू होता है। हालांकि, बिहार भाजपा के प्रवक्ता संतोष पाठक का कहना है कि अध्यक्ष विधानसभा के संरक्षक हैं, उन्होंने उस क्षमता में निमंत्रण भेजा। किसी भी मामले में, यह एक विधानसभा समारोह है। इससे भी बड़ा मजक तो यह हुआ कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कांग्रेस के एक दिवंगत नेता को भी न्योता भेजा गया है। अब्दुल हई पयामी ने 1980 के दशक में लौकाहा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था और उन्होंने चार साल पहले अंतिम सांस ली थी। उत्तर बिहार के मधुबनी जिले के कांग्रेस कार्यकर्ता उस समय हैरान रह गए है। जब पयामी साहब के नाम पर निमंत्रण पत्र आया। विधानसभा अधिकारियों को पता होना चाहिए कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहे। वहीं, विधानसभा सचिवालय ने कहा कि ‘सभी मौजूदा और पूर्व विधायकों व विधान परिषद सदस्यों’ को विधानसभा परिसर के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित होने वाले समारोह में आमंत्रित किया गया है। नाम न जाहिर करने की शर्त पर अधिकारियों ने स्वीकार किया कि एक मृत व्यक्ति को आमंत्रितों की उस सूची में शामिल करना, जिसे विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) द्वारा अनुमोदित किया गया था, एक ‘गंभीर चूक’ थी।
परसों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झारखंड के देवघर और बिहार के पटना में थे। उनके स्वागत झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत ने राज्य के सभी अखबारों में विज्ञापन जारी किए लेकिन बिहार में राजग सरकार ने ऐसा कोई विज्ञापन नहीं दिया। इससे लगता है कि बिहार में जदयू और भाजपा में सब बराबर नहीं चल रहा है। सुबह मोदी एम्स भवन और एयरपोर्ट का उद्घाटन सहित कई अन्य परियोजनाओं का शिलान्यास के लिए देवघर पहुंचे थे, जिसके बारे में केंद्र सरकार द्वारा अखबारों में विज्ञापन के अलावा झारखंड सरकार की ओर से मोदी के स्वागत में अलग से विज्ञापन दिया गया। इसके बाद बिहार विधानसभा भवन के शताब्दी वर्ष समापन समारोह के तहत विधानसभा परिसर में शताब्दी स्तंभ का लोकार्पण और संग्रहालय की आधारशिला रखने के लिए मोदी पटना में थे। मगर उनके स्वागत में पटना के किसी भी अखबार में नीतीश कुमार सरकार का ऐसा कोई विज्ञापन नहीं दिखा। महत्वपूर्ण यह था/है कि बिहार विधानसभा परिसर में पहली बार कोई प्रधानमंत्री पहुंचा था। यह आयोजन वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के प्रभाव का परिणाम है। लेकिन विधानसभा की तरफ से भी अखबारों में कोई विज्ञापन नहीं था। वैसे विधानसभा द्वारा एक दिन पहले अखबारों में कार्यक्रम के लिए आमंत्रण का विज्ञापन दिया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published.