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बाहुबली की रिहाई: राजपूत वोटों पर नजर

अजय भट्टाचार्य
कल
आनंद मोहन (Anand Mohan) के लाखों समर्थक जब गहरी नींद में सो रहे थे तभी सुबह 4:00 बजे आनंद मोहन हमेशा हमेशा के लिए सहरसा जेल से रिहा हो गए। खबर मिलने के बाद से उत्साही समर्थकों खुशियां मना रहे हैं।एक दूसरे के बीच लड्डू बांट रहे हैं और बधाई दे रहे हैं।लेकिन इसी बीच आनंद मोहन को जबरदस्त झटका लगा है। बताया जाता है कि उनकी रिहाई के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दर्ज करवाई गई है। इसमें कहा गया है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने गलत तरीके से जेल मैनुअल में बदलाव कर आनंद मोहन को बाहर निकाला है। दलित संगठन भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। संगठन ने कहा कि सरकार ने अपराधियों को बचाने के लिए कानून कर गलत काम किया है।

आनंद मोहन की रिहाई पर डीएम जी कृष्णैया की बेटी पद्मा ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार को अपने इस फैसले पर दोबारा सोचना चाहिए। सरकार ने एक गलत उदाहरण पेश किया है। ये सिर्फ एक परिवार के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि देश के साथ अन्याय है। उनकी बेटी ने रिहाई के खिलाफ अपील करने की भी बात कही है।

जी कृष्णैया की पत्नी ने कहा कि ऐसा वोट बैंक की राजनीति के लिए किया जा रहा है। पहले दोषी को फांसी की सजा हुई थी, फिर उसे उम्रकैद में बदल दिया गया। अब सरकार उसकी रिहाई करा रही है। ये बिल्कुल सही नहीं है।

दूसरी तरफ पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई से ज्यादा इसका श्रेय लेने की होड़ मची है। पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई से ज्यादा इसका श्रेय लेने की होड़ मची है। अगड़े और पढ़े-लिखे होने के आधार पर राजपूतों को भाजपा अपना अहम आधार वोट भले मानती है, लेकिन फिलहाल इस पार्टी ने बिहार में इस जाति के नेताओं को हाशिये पर रखा है। इसके दोनों अहम चेहरे राजीव प्रताप रूडी और राधा मोहन सिंह केंद्र में मंत्री की कुर्सी से दूर रखे गए हैं। दूसरी तरफ राज्य में सत्तारूढ़ महागठबंधन की देखें तो राजपूत युवाओं के बीच सबसे चर्चित चेहरे आनंद मोहन के परिवार को राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के परिवार से सहयोग मिला तो जदयू की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पीछे नहीं रहे। राजद के प्रभुनाथ सिंह (Prabhunath Singh) जेल में हैं तो जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) राजद के प्रदेश अध्यक्ष ही हैं। दिवंगत पूर्व सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह अंतिम कुछ दिनों की छोड़ दें तो लालू के सबसे करीबी रहे। जहां तक जदयू का सवाल है तो उसने दिवंगत पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटे सुमित कुमार सिंह को मंत्रिमंडल में जगह देकर अपने साथ कर रखा है। आनंद मोहन की रिहाई के साथ ही इसका श्रेय जनता दल यूनाईटेड (Janata dal United) के खाते में चला जाएगा। इसका असर पूरे बिहार में जदयू के सामने खड़ी होने वाली पार्टी पर पड़ेगा। बिहार की कुल सवर्ण आबादी में ब्राह्मणों के बाद और 5 प्रतिशत से ज्यादा राजपूतों की आबादी मानी जाती है। इनकी आबादी भूमिहारों से भी ज्यादा मानी जाती है।

पिछले करीब एक साल से बार-बार यह बात उठती है कि आनंद मोहन रिहा होने वाले हैं, लेकिन हो नहीं पा रहा। जब भाजपा से निकल कर महागठबंधन के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सरकार बनाई तो दो-तीन बार ऐसे मौके आए। आनंद मोहन की रिहाई से भाजपा के गढ़ कोसी-मिथिलांचल और राज्य में पार्टी के आधार वोटरों में से राजपूत वोटरों पर प्रभाव पड़ेगा।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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