न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
मुंबई। मालाड पूर्व स्थित कुरार इलाके के कोकणी माता मंदिर में स्थापित नर्मदेश्वर भगवान का आज भव्य जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एसआरए प्रशासन द्वारा मंदिर को ‘पात्र’ घोषित किए जाने के बाद कोकणी माता मंदिर बचाओ समिति ने विकासक से एमओयू के अनुसार पूरे निर्माण क्षेत्र, विशेषकर निर्धारित 1500 वर्ग फुट हॉल और ऑफिस का हक सुनिश्चित करने की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई।
मंदिर परिसर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। भक्तों ने विभिन्न पवित्र नदियों के जल से भगवान भोलेनाथ का विधिवत जलाभिषेक किया तथा रुद्राभिषेक संपन्न कराया। कार्यक्रम का आयोजन कोकणी माता मंदिर बचाओ समिति के तत्वावधान में किया गया। समिति का नेतृत्व विनोद मिश्रा और वैभव भंडारकर के साथ पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने किया।
समिति का कहना है कि एसआरए द्वारा मंदिर को पात्र घोषित करना अधिकारों की लड़ाई में पहला महत्वपूर्ण कदम है। अब विकासक से एमओयू के अनुसार पूरा निर्माण कार्य होने और संबंधित क्षेत्र नागरिकों तथा मंदिर को सौंपे जाने तक अभियान जारी रहेगा।
कार्यक्रम में विधायक सुनील प्रभु, भाजपा विधायक संजय उपाध्याय, भाजपा महाराष्ट्र उत्तर भारतीय मोर्चा अध्यक्ष संजय पांडे, शिवसेना नेता संजय निरुपम, दिंडोशी विधानसभा प्रमुख एवं निरीक्षक वैभव भंडारकर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता आनंद दुबे, शिवसेना नेता अमोल कीर्तिकर, सुहाष वाडकर, मुंबई कांग्रेस उपाध्यक्ष जयकांत शुक्ला, समाजसेवक गौरीशंकर चौबे, आरपीआई नेता हरिहर यादव और राजेश दुबे सहित कई राजनीतिक, सामाजिक एवं स्थानीय गणमान्य लोग मौजूद रहे। कोकणी माता मंदिर बचाओ समिति के अध्यक्ष दिलेश किरने और एसआरए सोसायटी के चीफ प्रमोटर विष्णु सावंत सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। सभी उपस्थित लोगों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और मंदिर को बचाने तथा उसके अधिकारों को सुरक्षित करने के अभियान को समर्थन दिया।
भाजपा नेता व पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा ने कहा, “मंदिर की पात्रता हासिल होना हमारी लड़ाई का पहला कदम है। जब तक एमओयू के अनुसार पूरा निर्माण कार्य नहीं होता और मंदिर का निर्धारित क्षेत्र हमें नहीं सौंपा जाता, तब तक कोकणी माता मंदिर बचाओ समिति का यह साझा प्रयास जारी रहेगा।”
धार्मिक आस्था और मंदिर के अधिकारों को लेकर आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की मौजूदगी रही। जलाभिषेक-रुद्राभिषेक के साथ भक्तों ने आशीर्वाद लिया और मंदिर बचाने के संकल्प को दोहराया। यह कार्यक्रम आस्था के साथ-साथ मंदिर अधिकारों की लड़ाई का बड़ा मंच बना, जहां समिति और नागरिक एकजुट होकर अपना पक्ष मजबूती से रखा।
