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कृष्णा बेउरा की दिलकश आवाज़ में गुजराती फ़िल्म लालो के गीत की गूँज

मुंबई। दर्द, सुर और सूफ़ियाना अहसास का अनमोल स्वर हैं कृष्ण। आजकल दुनिया भर में उनकी की दिलकश आवाज़ में गुजराती फ़िल्म लालो का गीत गूँज रहा है। गीत के बोल हैँ – ” मन मोहन “। संगीत स्मित जय और गीत प्रेम दवे ने लिखा है। यह गीत बेहद कर्णप्रिय बन पड़ा है और लोगों को खूब लुभा रहा है. खास बात ये है कि KRISHNA ओड़िशा के रहने वाले हैँ गुजराती भाषा में उन्होंने यह बेहतरीन गीत गाया है. KRISHNA का मानना है कि संगीत भाषा और प्रांत या देश की सीमाओं से परे होता है। अच्छा गीत – संगीत हर जगह पसंद किया जाता है। जैसा कि सब जानते हैँ दुनिया में कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो सीधे दिल पर असर करती हैं। KRISHNA उन्हीं दुर्लभ गायकों में से हैं, जिनकी गायकी दर्द, मोहब्बत, जुनून और सूफ़ियाना रंगों का संगम प्रस्तुत करती है। ओड़िशा के KRISHNA ने बचपन से ही संगीत की बारीकियों को समझा, और आगे चलकर बॉलीवुड को कई यादगार गीत दिए, जो आज भी श्रोताओं के दिलों में बसे हुए हैं। ” मौला मेरे ले ले मेरी जान ” ( चक दे ) ” ठुकराके मेरा प्यार मेरा इंतक़ाम देखेगी ” ( शादी में जरूर आना ) उनके सुपर हिट सॉन्ग हैँ।
गायिकी की ख़ासियत —
KRISHNA का असली जादू उनकी आवाज़ की रूहानी गहराई में है। उनके गायन में सूफ़ियाना मिठास, उच्च सुरों की ताकत और दर्द का वह रंग मिलता है जो हर सुनने वाले को अपने साथ बाँध लेता है। यही कारण है कि उनके अधिकतर लोकप्रिय गीत भावनात्मक, दर्दभरे या गहरे एहसास से जुड़े हुए हैं। लोग उन्हें Bollywood’s High-Pitch King भी कहते हैं।
क्यों खास हैं KRISHNA?
उनकी आवाज़ में दर्द और जुनून का अनोखा संगम है। ऊँचे सुरों पर बेहतरीन पकड़, सूफ़ियाना टच, हर गीत को अपनी अलग पहचान देना, संगीत के प्रति पूर्ण समर्पण उनकी विशेषता है।
उनके गाये गीत केवल सुनने लायक नहीं, बल्कि महसूस करने लायक हैं।
KRISHNA एक ऐसी आवाज़ के मालिक हैँ जो दर्द को सुरों में ढाल देती है भारतीय संगीत ने दुनिया को कई रंग, कई भावनाएँ और कई बेमिसाल आवाज़ें दी हैं। पर कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो भारी भीड़ में भी अकेली और अनोखी नजर आती हैं। KRISHNA ऐसी ही एक आवाज़ हैं—रूहानी, दर्दभरी, सूफ़ियाना और अद्वितीय। उनके गाये गीत सिर्फ सुनाई नहीं देते, बल्कि भीतर उतरकर दिल की धड़कनों को छूते हैं। पिछले दो दशकों में उन्होंने बॉलीवुड को कई यादगार गानें दिए, जिन्हें आज भी संगीत-प्रेमी वही जुनून और सम्मान के साथ सुनते हैं। यही वजह है कि उन्हें दर्दभरे, भावनात्मक, और सूफ़ियाना गीतों का बादशाह कहा जाता है। उनका सुर “चीखता” नहीं, बल्कि “जख़्मों को सुर देकर गाता” हुआ महसूस होता है। उनके लिए गीत सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक संवेदना है—एक कहानी, जिसे आवाज़ के जरिये जीवंत किया जाता है। KRISHNA की स्टेज प्रेज़ेंस अलग ही स्तर की है। उनके लाइव शो में: सुर ऊँचे होते हैं एहसास गहरा होता है ऊर्जा दर्शकों को बांध लेती है और उनकी आवाज़ का दम हर नोट में सुनाई देता है कई लोग कहते हैं कि KRISHNA की सच्ची ताकत उनके live concerts में झलकती है।
भाषाओं का फ़नकार – ओड़िया से बॉलीवुड तक उन्होंने ओड़िया, हिंदी, पंजाबी, भोजपुरी, और इंडी म्यूज़िक तक—कई भाषाओं में अपनी आवाज़ दी है। हर भाषा, हर शैली में वे एक जैसे ही प्रभावी साबित होते हैं। उनका मानना है कि भाषा बदल सकती है, लेकिन भावनाएँ हमेशा वही रहती हैं, और गायक का काम भाव को श्रोताओं तक पहुँचाना है।
व्यक्तित्व: विनम्र, गंभीर और संगीत के प्रति समर्पित KRISHNA की सबसे अच्छी बात है उनका down-to-earth personality। KRISHNA जब भी भारतीय संगीत के इतिहास की बात होती है , दर्दभरी और सूफ़ियाना आवाज़ों की सूची में उनका नाम हमेशा बड़े सम्मान से लिया जाता है । उनकी आवाज़ ने फिल्मों को, किरदारों को, और कहानियों को एक दिल छू लेने वाली गहराई दी है। KRISHNA सिर्फ एक गायक नहीं—एक एहसास हैं, जो सुरों में दर्द को, प्रेम को, और रूह को पिघलाकर श्रोताओं तक पहुँचाते हैं।
हाल ही में उन्होंने फ़िल्म बागी -4 के लिए भी गीत गया था. नेटफ्लिक्स पर “बारामुला ” में एक गीत गया है।
इसी प्रकार ” भीगी भीगी ज़ुल्फ़ेँ ” एक एल्बम सॉन्ग भी शीघ्र रिलीज होने जा रहा है। फ़िल्म के हीरो संगीत मासूम हैँ।
फिलहाल KRISHNA का गुजरती गीत ” मनमोहन ” लोगों को बेहद पसंद आ रहा है। जो देश विदेश में रहने वाले गुजराती समाज में एक अद्भुत छाप छोड़ चुका है।

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