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‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को साकार करते नवोदय विद्यालय, शिक्षा के साथ संस्कारों का भी दे रहे संदेश: पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
मुंबई।
शिक्षा ही वह रोशनी है, जिससे एक समृद्ध, सक्षम और विकसित भारत गढ़ा जा सकता है। एक सरकारी संस्थान होने के बावजूद नवोदय विद्यालय अपनी उत्कृष्ट शिक्षा व बेहतर परीक्षा परिणामों की वजह से आज शीर्ष पर है। राजनीति, प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, शैक्षणिक, सैन्य सेवाओं से लेकर विभिन्न प्रोफेशनल सेवाओं, बिजनेस और सामाजिक सेवाओं में नवोदयन्स पूरे भारत ही नहीं वरन पूरी दुनिया में पहचान बना रहे हैं। 13 अप्रैल, 1986 को दो नवोदय विद्यालयों से आरंभ हुआ यह सफर आज 661 तक पहुँच चुका है। नवोदय अपनी स्थापना के 40 साल पूरा कर रहा है। देश भर में नवोदय विद्यालय के 17 लाख से अधिक पुरा विद्यार्थियों का नेटवर्क समाज को नई दिशा देने के लिए तत्पर है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ एवं ‘शिक्षार्थ आइए, सेवार्थ जाइए’ की भावना से प्रेरित नवोदय में जाति, संप्रदाय, क्षेत्र से परे सिर्फ राष्ट्र प्रेम की भावना है। उक्त उद्गार नवोदय विद्यालय, आज़मगढ़ के पुरा छात्र एवं पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने ‘नवोदय स्थापना दिवस’ पर व्यक्त किये।
नवोदय विद्यालय से सिविल सर्विसेज में चयनित आरंभिक विद्यार्थियों में रहे पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि, वर्ष 2001 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित भारत की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में चयनित होने के उपरांत पिछले 24 सालों में देश के विभिन्न भागों में पदस्थ रहा, परन्तु इतना अवश्य कहूँगा कि यदि मैं नवोदय विद्यालय में नहीं रहता तो शायद ही यहाँ तक पहुँच पाता। श्री यादव ने कहा कि, मुझे गर्व है कि मैं नवोदय का हिस्सा रहा हूँ। हमारे व्यक्तित्व और कैरियर के निर्माण में नवोदय का बहुत बड़ा योगदान रहा है। नवोदय ने हमें सिखाया कि सपने सिर्फ देखे नहीं जाते, उन्हें जिया भी जाता है — संघर्ष, अनुशासन और समर्पण के साथ। नवोदय विद्यालय से निकले लगभग तीन दशक से ज्यादा हो गए पर अभी भी वही लगाव और अपनत्व बरकरार है। नवोदय ने हम सभी को बहुत कुछ दिया है, अब ‘पे बैक टू सोसाइटी’ की जरुरत है। गौरतलब है कि श्री कृष्ण कुमार यादव उत्तर प्रदेश के नवोदय विद्यालयों से सिविल सर्विसेज में सफल प्रथम मेधावी व्यक्ति रहे हैं।
एक प्रशासक के साथ-साथ वरिष्ठ साहित्यकार और ब्लॉगर के रूप में भी ख्याति प्राप्त पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि, अधिकतर ग्रामीण पृष्ठभूमि के नवोदय विद्यार्थी आज जिन ऊँचाइयों पर हैं, उसका श्रेय नवोदय की नव उदय की उस भावना को जाता है, जहाँ जात-पात, धर्म, अमीर-गरीब, शहरी-ग्रामीण जैसे तमाम विभेद भूलकर सब सिर्फ एक सकारात्मक सोच के साथ नए पथ पर अग्रसर होते हैं। नवोदयी भावना एक ऐसा अनमोल रिश्ता है, जो हर नवोदयन के दिल में खास जगह बनाए हुए है। ये सिर्फ एक समूह नहीं, बल्कि एक ऐसा अनूठा परिवार है जिसमें अलग-अलग राज्यों या जिलों के नवोदय विद्यालय भले ही हों, लेकिन जज़्बा, अपनापन और यादों की मिठास सबमें एक जैसी है। भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण करने में नवोदयन्स की अहम भूमिका है। नवोदय परिवार आज भी बेहद संगठित है और लोग एक दूसरे से दिल से जुड़े हैं। सुख-दुःख में एक दूसरे के साथ जिस तरह से खड़े रहते हैं, वह मन में हैरत ही नहीं गर्व भी पैदा करता है।
पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि ‘हमीं नवोदय हों’ की भावना के साथ आज नवोदय एक ब्रांड बन चुका है। नवोदय ने ग्रामीण भारत के होनहार बच्चों को न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दी, बल्कि आत्मविश्वास, संस्कार और देशसेवा की भावना भी दी। नवोदय विद्यालय का विजन है, “मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को उनके परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना, गुणात्मक आधुनिक शिक्षा प्रदान करना, जिसमें सामाजिक मूल्यों, पर्यावरण के प्रति जागरूकता, साहसिक कार्यकलाप और शारीरिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण घटकों का समावेश हो।” नवोदय विद्यालय का आदर्श वाक्य “प्रज्ञानं ब्रह्म” ऋग्वेद के ऐतरेय उपनिषद से एक महावाक्य है, जिसका अर्थ है “प्रकट ज्ञान या चेतना ही ब्रह्म है”। यह उच्च-गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए नवोदय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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