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जमाकर्ताओं के हित में भारत मर्चेंट्स चेंबर की बैंकों से दो बड़ी मांग, अध्यक्ष मनोज जालान ने लिखा केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र

न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क 

मुंबई। भारत मर्चेंट्स चेंबर के अध्यक्ष मनोज जालान ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक ज्ञापन सौंपकर बैंकिंग सिस्टम में दो प्रमुख बदलावों की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर भी मासिक ब्याज का भुगतान किया जाए, न कि त्रैमासिक या छमाही आधार पर।

 जालान ने तर्क दिया कि बैंक ग्राहकों से पर्सनल लोन, बिजनेस लोन और अन्य कर्जों पर मासिक ब्याज वसूलते हैं, तो जमाकर्ताओं को भी एफडी पर मासिक ब्याज मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई परिवार ऐसे हैं जिनका घरेलू खर्च मुख्य रूप से बैंक डिपॉजिट से मिलने वाले ब्याज पर ही निर्भर करता है। ऐसे में मासिक ब्याज की सुविधा से इन परिवारों को नियमित आय मिल सकेगी और उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।

 इसके अलावा, चेंबर अध्यक्ष ने बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस लिमिट बढ़ाने की भी मांग की है। वर्तमान में डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) के तहत प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक 5 लाख रुपये तक का बीमा उपलब्ध है, जो 2020 में बढ़ाया गया था। जालान ने प्रस्ताव दिया कि इसे बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया जाए। उनका कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में कमजोरी या संकट की स्थिति में यह राशि अपर्याप्त है। 20 लाख तक का बीमा जमाकर्ताओं में सुरक्षा की भावना पैदा करेगा और बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा बढ़ाएगा।

 भारत मर्चेंट्स चेंबर ने इस संबंध में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को भी अलग से पत्र लिखा है। यह मांग ऐसे समय में आई है जब कई वरिष्ठ नागरिक और मध्यम वर्ग के परिवार ब्याज आय पर निर्भर हैं, जबकि बैंकिंग नियमों में बदलाव की चर्चा चल रही है।

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