न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
अहमदाबाद। हिंदी मात्र एक भाषा नहीं, अपितु भारतीय संस्कृति, संस्कारों एवं जीवन मूल्यों की प्रबल संवाहक है। हिंदी हमारी मातृभाषा के साथ-साथ राजभाषा भी है, ऐसे में इसके विकास के लिए जरुरी है कि हम हिंदी भाषा को व्यवहारिक क्रियाकलापों के साथ-साथ राजकीय कार्य में भी प्राथमिकता दें। उक्त उद्गार उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने डाक विभाग द्वारा क्षेत्रीय कार्यालय, अहमदाबाद में आयोजित हिंदी पखवाड़ा के शुभारंभ के अवसर पर व्यक्त किए। इससे पूर्व उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्वलित कर ‘हिंदी दिवस’ एवं ‘हिंदी पखवाड़ा’ (14-28 सितंबर) का शुभारंभ किया।
पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि अपनी सहजता, मधुरता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर हिंदी भाषा ने वैश्विक स्तर पर विशेष प्रतिष्ठा अर्जित की है। एथनोलॉग के अनुसार हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, वहीं विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। जनतांत्रिक आधार पर हिंदी विश्व भाषा है क्योंकि उसके बोलने-समझने वालों की संख्या संसार में तीसरी है। विश्व के 132 देशों में जा बसे भारतीय मूल के लगभग 2 करोड़ लोग हिंदी माध्यम से ही अपना कार्य निष्पादित करते हैं। विदेशों में 150 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है।
पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हिन्दी सिर्फ संवाद व साहित्य ही नहीं बल्कि विज्ञान से लेकर संचार-क्रांति, सूचना-प्रौद्योगिकी और नवाचार की भाषा भी है। भारत सरकार द्वारा विकास कार्यक्रमों और जनसेवाओं के संचालन में हिंदी के प्रयोग को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। आज स्थिति यह है, कि संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में भी हिंदी की आवाज़ गूंजने लगी है। हिन्दी भाषा की मधुरता में वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना निहित है और इसकी सरलता में गहन ज्ञान का सागर समाहित है। ‘हिंदी दिवस’ का दिन सिर्फ एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उस भाषा का उत्सव है जिसने हमारे दिलों को जोड़ा, सपनों को शब्द दिए और भावनाओं को आवाज़। बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप राजभाषा, संपर्क भाषा और महत्वपूर्ण ज्ञानभाषा बने रहने के लिए हिंदी को तकनीकी रूप से और समृद्ध बनना होगा। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व है, कि वह आत्मविश्वास के साथ हिंदी में कार्य करे और इसकी उन्नति में सहयोग प्रदान करे।
सहायक निदेशक (राजभाषा) श्री अल्पेश शाह ने बताया कि हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत 14 से 28 सितंबर, 2026 तक उत्तर गुजरात परिक्षेत्र में डाककर्मियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें निबंध लेखन, काव्य-पाठ, हिंदी व्याकरण, प्रश्नोत्तरी, अनुवाद, तात्कालिक भाषण हिंदी कार्यशाला तथा अंताक्षरी का आयोजन किया जाएगा।
सहायक निदेशक श्री श्री रितुल गांधी ने प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 सितंबर, 1949 को देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने का निर्णय लिया गया। सहायक निदेशक वारिस वहोरा ने कहा कि समस्त भारतीयों को एकता के सूत्र में पिरोने वाली हिंदी वह कड़ी है, जो हमें एक-दूसरे से जोड़ती है और हमारी भावनाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करती है।
कार्यक्रम में सहायक निदेशक (राजभाषा) श्री अल्पेश आर. शाह, सहायक निदेशक श्री वारिस वहोरा, श्री रितुल एन. गांधी, वरिष्ठ लेखाधिकारी सुश्री पूजा राठोर, सहायक अधीक्षक श्री जीनेश पटेल, श्री रमेश पटेल, श्री रोनक शाह, डाक निरीक्षक श्री भाविन प्रजापति, सुश्री पायल पटेल, सहायक लेखाधिकारी श्री रामस्वरूप मंगवाना, श्री सुभाष बरूपाल तथा श्री योगेश पंचोली सहित तमाम विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री गौरी शंकर कुमावत ने किया।
